पूर्व नौकरशाह अश्विनी वैष्णव ने संभाला रेल मंत्रालय का कार्यभार

नई दिल्ली। पूर्व नौकरशाह अश्विनी वैष्णव ने आज रेल मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। उन्हें बुधवार को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था और रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रेलवे से साथ-साथ उन्हें आईटी और संचार मंत्रालय का कार्यभार भी सौंपा गया है। वैष्णव को ऐसे समय मंत्री बनाया गया है जब रेलवे की इनकम बढ़ाने के लिए विभिन्न तरीकों पर विचार किया जा रहा है। इसमें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल भी शामिल है।
राजस्थान के जोधपुर में जन्मे 51 साल के वैष्णव 1994 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। आईएएस रहते हुए उन्होंने 15 साल तक कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी फ्रेमवर्क में योगदान के लिए ही जाना जाता है। मोदी सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल होना बहुत सारे लोगों को चौंका गया, हालांकि उन्होंने दो साल पहले भी ओडिशा से भाजपा के टिकट पर राज्यसभा का चुनाव जीत कर सबको सकते में डाल दिया था। तब पार्टी के पास विधायकों की संख्या इतनी नहीं थी कि वह चुनाव जीत सकें।
वाजपेयी के सचिव
भाजपा में होने के बावजूद उन्होंने राज्यसभा चुनाव में ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक का समर्थन हासिल कर लिया। बीजद के भीतर कई नेताओं ने इसकी आलोचना की थी। आरोप लगाए गए कि पटनायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दबाव में झुक गए और वैष्णव का समर्थन कर दिया। वैष्णव 28 जून, 2019 को हुए इस राज्यसभा चुनाव से सिर्फ छह दिन पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे।
प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने बालेश्वर और कटक जिलों के कलेक्टर की जिम्मेदारी निभाई। साल 1999 में आए भीषण चक्रवात के समय उन्होंने बतौर नौकरशाह अपने कौशल का परिचय दिया और उनकी सूचना के आधार पर सरकार त्वरित कदम उठा सकी जिससे बहुत सारे लोगों की जान बची। वैष्णव ने 2003 तक ओडिशा में काम किया और फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यालय में उप सचिव नियुक्त हो गए। वाजपेयी जब प्रधानमंत्री पद से हटे तो वैष्णव को उनका सचिव बनाया गया।
अमेरिका से एमबीए
आईआईटी से पढ़ाई कर चुके वैष्णव ने 2008 में सरकारी नौकरी छोड़ दी और अमेरिका के वार्टन विश्वविद्यालय से एमबीए किया। वापस लौटने के बाद उन्होंने कुछ बड़ी कंपनियों में नौकरी की और फिर गुजरात में ऑटो उपकरण की विनिर्माण इकाइयां स्थापित कीं। इसी साल अप्रैल में उन्हें भारतीय प्रेस परिषद का सदस्य नामित किया गया था। अब उन्हें भारतीय रेलवे के कायाकल्प की अहम जिम्मेदारी दी गई है।
-एजेंसियां

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