दो-तीन दिन के लिए एक बार फिर टल गया तालिबानी सरकार का गठन, आधिकारिक बयान जारी करके दी जानकारी

अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार का गठन शनिवार को भी नहीं हो सका और यह एक बार फिर टल गया। तालिबान ने आधिकारिक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी और बताया कि सरकार का गठन अब दो से तीन दिन के बाद होगा। सरकार में शामिल लोगों के नामों का खुलासा भी उसी दिन होगा। इससे पहले शुक्रवार को नई अफगान सरकार के गठन की अटकलें लगाई गई थीं जो बाद में टल गया। कुछ सूत्र पहले ही इसके लिए अगले हफ्ते के किसी दिन का अनुमान लगा चुके हैं।
कौन होंगे सरकार के प्रमुख चेहरे
तालिबान के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि समूह काबुल में ईरानी नेतृत्व की तर्ज पर सरकार गठन का ऐलान करने के लिए तैयार है, जिसमें समूह के शीर्ष धार्मिक नेता मुल्ला हेबतुल्लाह अखुनजादा अफगानिस्तान में सर्वोच्च प्राधिकारी होंगे। वहीं मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को राष्ट्रपति का पद मिल सकता है। हक्कानी नेटवर्क का प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी भी सरकार में बड़ी जगह पा सकता है। वहीं तालिबानी नेता और सिराजुद्दीन हक्कानी का भाई अनस हक्कानी भी बड़े किरदार में सामने आ सकता है। लगातार चर्चा में बने तालिबानी प्रवक्ता सुहैल शाहीन को अफगान सरकार में बड़ा पद मिलने की उम्मीद हैं।
अगले हफ्ते गठन की उम्मीद
एक दूसरे तालिबानी सूत्र ने कहा कि तालिबान का सुप्रीम लीडर हैबातुल्लाह अखुंदजादा धार्मिक मामलों और इस्लाम के मुताबिक शासन को देखरेख करेगा। सूत्रों की मानें तो तालिबानी सरकार में सिर्फ समूह के सदस्य ही शामिल होंगे। सूत्र ने कहा कि इसमें 25 मंत्रालय शामिल होंगे, जिसमें 12 मुस्लिम विद्वानों की सलाहकार परिषद या शूरा होगी। सभी लोग सरकार गठन का पुख्ता दावा कर रहे हैं। हालांकि इसकी समय सीमा को लेकर लोगों के मत अलग-अलग हैं। किसी का अनुमान शनिवार को सरकार गठन का है तो कोई इसके लिए अगले हफ्ते की उम्मीद कर रहा है।
पंजशीर बना तालिबान का सिरदर्द
सरकार के गठन की तारीख ऐसे समय पर आगे बढ़ रही है जब तालिबान के लिए पंजशीर एक तनावग्रस्त क्षेत्र बना हुआ है। तालिबान का दावा है कि उसने पंजशीर को अपने नियंत्रण में ले लिया है और अब पूरे अफगानिस्तान पर उसका कब्जा हो गया है। वहीं अमरुल्लाह सालेह लगातार तालिबानी दावों को खारिज कर नॉर्दर्न अलांयस की जीत की बात कर रहे हैं। सरकार गठन के बाद तालिबान के आगे पंजशीर जैसी कई बड़ी चुनौतियां आने वाली हैं। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से नीचे जा रही है, कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं और कई दिनों से जारी संघर्ष में अब तक लाखों अफगान मर चुके हैं।
-एजेंसियां

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