कश्‍मीर में अब खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं विदेशी

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की मौजूदा परिस्थियों में आप वहां विदेशी पर्यटकों की उम्मीद नहीं कर सकते, लेकिन अगर हाउसबोट्स से घिरी डल झील की ओर जाएंगे तो आश्चर्य में पड़ जाएंगे। यहां हाउसबोट की सीढ़ियों पर स्कॉटलैंड से आए स्टीन बैलेंटाइन अपने गिटार के साथ बैठे हैं। अनुरोध करने पर वह जॉन प्राइन का लिखा हुआ एक गीत भी सुनाते हैं, जो पहाड़ों और बारिश की बूंदों के बीच काफी मनमोहक लगता है।
बैलेंटाइन कश्मीर के उन 928 विदेशी पर्यटकों में से एक हैं, जो 5 अगस्त से 30 सितंबर के बीच श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचे थे। वह विज्ञान के शिक्षक हैं। कश्मीर को लेकर विदेशी मीडिया भले ही कुछ भी कह रहा हो, लेकिन विदेश टूरिस्ट इसकी एकदम उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि कश्मीर को लेकर जिस तरह का माहौल विदेशी मीडिया में बनाया जा रहा है, वैसा बिल्कुल नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि घाटी में फोन और इंटरनेट न होने की वजह से उनकी यात्रा काफी मुश्किलों से भरी रही।
लगातार आ रहे हैं विदेशी सैलानी
बता दें कि बीते 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस ले लिया था। इसके बाद से घाटी के सभी इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात थे। हालांकि, इन परिस्थितियों में भी 5 और 6 अगस्त को घाटी में क्रमशः 24 और 9 विदेशी सैलानी मौजूद थे। इसके बाद से लगातार प्रतिबंधों के बीच जम्मू-कश्मीर में घरेलू सैलानियों की मौजूदगी जीरो हो गई थी लेकिन इस बीच भी विदेशी सैलानियों का आना जारी रहा। फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन ऑफिस की माने तो 5 अगस्त से 30 सितंबर के बीच 928 विदेशी टूरिस्ट श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचे थे। हालांकि इनमें पत्रकारों को शामिल नहीं किया गया है।
पिछले साल आए थे 9 हजार सैलानी
रेकॉर्ड्स बताते हैं कि मौजूदा मौसम में घाटी में सैलानियों की अच्छी-खासी भीड़ होती है। पिछले साल इस दौरान 9 हजार 589 सैलानी घाटी में घूमने आए थे। इस बार इन आंकड़ों में भारी गिरावट आई है लेकिन फिर भी मौजूदा परिस्थितियों में इतनी तादाद में सैलानियों का घाटी में मौजूद होना असामान्य है। इतना ही नहीं, विदेशी पर्यटकों की तुलना में यहां घरेलू पर्यटकों की मौजूदगी में अपेक्षाकृत ज्यादा गिरावट आई है।
कम पहुंच रहे घरेलू पर्यटक
रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 अगस्त से 30 सितंबर के बीच कुल 4 हजार 167 घरेलू सैलानी ही श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचे जबकि पिछले साल इस मौसम में यह संख्या 1.45 लाख थी। ऐसे में सवाल उठता है कि विदेशी सैलानियों की इतनी संख्या में मौजूदगी घाटी में क्यों है? कुछ लोग बताते हैं कि विदेशी इस समय कश्मीर को पहले से ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं क्योंकि अभी यहां की सुरक्षा व्यवस्था केंद्र सरकार के अधीन है।
शांति और सुरक्षा को लेकर आश्वस्त सैलानी
इसके अलावा घाटी के अस्थिर हालात के चलते यहां सैलानियों की संख्या भी कम है और एकांत और शांति के ज्यादा मौके हैं। साथ ही हाउसबोट्स की दरें भी पहले के मुकाबले काफी कम हैं। बताया जा रहा है कि हाउसबोट्स के जो रेट पीक टाइम्स में 10 हजार रुपये प्रति रात्रि होते थे, उनकी मौजूदा कीमत ढाई हजार से 4 हजार के बीच है। वहीं, दिल्ली और मुंबई से श्रीनगर एयरपोर्ट की फ्लाइट टिकट्स की दरों में भी काफी कमी पर्यटकों को घाटी की ओर आकर्षित कर रही है।
पर्यटकों के अनुभव
जर्मनी से आए बार्बरा स्ट्रॉस बताते हैं कि वह यहां स्विट्जरलैंड नाम के हाउसबोट में रुके हैं। उन्होंने कहा कि यहां किसी कश्मीरी ने उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की है। यह उनकी आजीविका का साधन है। स्ट्रॉस बताते हैं कि कश्मीर आने का यह सबसे सही समय है क्योंकि फिलहाल, यहां पर्यटकों की भीड़ नहीं है और काफी शांति है। मलेशिया की सैलानी बिंटी शाउन नुप्रे ने बताया कि उनके देश के युवा स्कॉलर ‘कॉन्फ्लिक्ट-प्रोन’ जगहों जैसे- जेरुसलम, उईगुर और कश्मीर में जाने को आवेदन करते हैं। वे वहां की परिस्थियों के बारे में करीब से महसूस करना चाहते हैं।
कश्मीर आए कई पर्यटकों ने बताया कि कश्मीर को लेकर काफी बढ़ा-चढ़ाकर डर फैलाया जाता है। हालांकि, उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि घाटी में फोन और इंटरनेट न होने की वजह से उनकी यात्रा काफी मुश्किलों भरी रही।
-एजेंसियां

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