आयुर्वेद के सुझाए सही मॉर्निंग रूटीन को करें फॉलो, जीवन रहेगा व्‍यवस्‍थित

आयुर्वेद के सुझाए इस सही मॉर्निंग रूटीन को फॉलो करें और परिवार के लोगों को भी बताएं, इससे आप अपने जीवन को व्यवस्थित कर सकेंगे।
वह दिन गए जब रात की नींद पूरी करने के बाद सुकून से उठते थे और सुबह के सारे काम आराम से करते थे। मॉर्निंग वॉक के बाद चाय या कॉफी की चुस्की लेते हुए अखबार बढ़ना। आजकल की सुबहें हौचपौच वाली होती हैं। हर किसी को देर हो रही होती है। इस भागदौड़ के बीच आपको अपने लिए जरा भी वक्त नहीं मिलता।
डिजिटल डिस्ट्रैक्शन बड़ी समस्या
हमारे जीवन में डिजिटल क्रांति आने के बाद से तो सुबह से लेकर रात तक का वक्त हमारा नहीं रहा। सोने के पहले से उठने के बाद तक हम इस डिजिटल डिस्ट्रैक्शन में फंसे रहते हैं।
सुबह जल्दी उठें
आयुर्वेद के मुताबिक सुबह उठने का सही टाइम ब्रह्म मुहूर्त है। इसका मतलब है सूरज निकलने के दो घंटे पहले। इसकी वजह यह है कि आपको अपने काम की शुरुआत करने से पहले पर्याप्त समय मिल जाता है। अगर आप नहीं उठ पाते तो परेशान न हों, आप धीरे-धीरे प्रैक्टिस करें और जल्द ही आपकी आदत पड़ जाएगी।
चेहरे पर डालें पानी के छींटे
सोकर उठने के बाद सबसे पहले चेहरे पर पानी के छींटे डालें। आंखों मे पानी के छींटे मारना आंखों के लिए बढ़िया एक्सर्साइज माना जाता है। ज्यादा गरम या ठंडा पानी इस्तेमाल न करें। पानी का तापमान नॉर्मल रहे।
पेट साफ होना जरूरी
पेट साफ करने के लिए पर्याप्त वक्त दें। रातभर में शरीर के टॉकिन्स की सफाई होती है, यह जरूरी है कि इसे शरीर से बाहर निकाला जाए। आयुर्वेद के हिसाब से सुबह एक बार फ्रेश होने जरूर जाएं, अगर आपको प्रेशर न आए तो समझ लीजिए कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई।
अच्छी तरह करें दांतों की सफाई
आयुर्वेद में दांतों की सफाई और जीभ साफ करने को काफी महत्व दिया गया है। मुंह की सफाई जरूरी है, ध्यान रखें कि आपका ब्रश फाइबर वाला हो लेकिन सॉफ्ट हो। लोग ज्यादातर मीठा टूथपेस्ट इस्तेमाल करते हैं लेकिन टूथपेस्ट कड़वा होना चाहिए और इसमें हल्की मिठास होनी चाहिए।
गरारा भी जरूरी
हम गरारा तभी करते हैं जब हमारे गले में इंफेक्शन हो जाता है, लेकिन इसे हमें अपने डेली रूटीन में शामिल करना चाहिए। नमक मसूड़ों के सॉफ्ट टिश्यूज को साफ करता है।
गुनगुने तेल से मसाज
इसके बाद अगला काम तेल से मसाज है। आयुर्वेद में शरीर पर तेल लगाने को महत्व दिया गया है, कोई भी मॉइश्चराइजर इसकी जगह नहीं ले सकता। सर्दियों में हफ्ते में कम से कम तीन दिन मसाज करें और गर्मियों में दो बार। पूरे शरीर की मसाज करना अच्छा होगा लेकिन अगर ज्यादा वक्त नहीं तो नाभि, पैर के तलवे, सिर, कान, हाथ और कोहनियों की मसाज करें। नहाने के पहले ऑइलिंग करें और मसाज के लिए ऑलिव, नारियल और सरसों के तेल अच्छे होते हैं।
हल्का वर्कआउट
आयुर्वेद में हल्की कसरत या आसन से दिन की शुरुआत करना अच्छा माना जाता है। इससे रक्त संचार बढ़ता है और फ्लैग्जिबिलिटी आती है। आप वॉक कर सकते हैं, एक्सर्साइज या योग कर सकते हैं लेकिन ध्यान रखें कि इससे खुद को थकाएं नहीं।
आखिर में यह ध्यान रखें
जरूरी नहीं कि आप यहां बताए गए सभी स्टेप्स एक ही बार में फॉलो करने लगें। धीरे-धीरे आदत बनाएं। आप खुद में एनर्जी फील करेंगे और खुद ही जल्दी उठना और सारा रूटीन फॉलो करना शुरू कर देंगे।
-एजेंसियां

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