कश्मीर में नज़रबंद किए गए पांच नेता रिहा

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद नज़रबंद किए गए नेताओं को धीरे-धीरे रिहा किया जा रहा है। इसी क्रम में आज यानी कि गुरुवार को पांच नेताओं को रिहा कर दिया गया है। रिहा किए गए नेताओं में नेशनल कांफ्रेंस के सलमान सागर, शौकत गनई, अल्ताफ कल्लू और पीडीपी के निजामुद्दी भट एवं मुख्तियार बाबा शामिल हैं।

इससे पहले 30 दिसंबर को पांच राजनीतिक नेताओं को रिहा किया गया था। ये पांचों नेता नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के थे, जिन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया था। फिलहाल, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती अभी भी नज़रबंद हैं।

30 दिसंबर को रिहा किए गए नेताओं में नेकां के इशफाक जब्बर व गुलाम नबी भट तथा पीडीपी के बशीर मीर, जहूर मीर और यासिर रेशी शामिल हैं। रेशी पीडीपी के बागी नेता माने जाते हैं, जिन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के खिलाफ बगावत कर दी थी। नए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 25 नवंबर को दो नेताओ पीडीपी के दिलावर मीर और डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट के गुलाम हसन मीर को रिहा किया था।

तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों डा फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफती व पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन व जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट के शाह फैसल फिलहाल बंद ही रहेंगे। गौरतलब है कि 18 जनवरी से 25 जनवरी तक जम्मू कश्मीर में 36 केंद्रीय नेता अलग अलग जिलों व शहरों का दौरा करेंगे।

आज दोपहर को रिहा किए गए नेताओं पहलगाम से नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व विधायक अल्ताफ अहमद कालू, नेशनल कांफ्रेंस की युवा इकाई के प्रदेश प्रधान और श्रीनगर नगर निगम के पूर्व मेयर सलमान सागर, शौकत गनई पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व विधायक निजामदीन बट और मुख्तार बाबा शामिल हैं।

लोन, शाह फैसल की रिहाई पर अभी विचार नहीं

पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन, पूर्व नौकरशाह शाह फैसल, पीडीपी नेता नईम अख्तर, वहीद-उर-रहमान पारा और नेकां महासचिव अली मुहम्मद सागर को फिलहाल रिहा करने की कोई योजना नहीं है। इन नेताओं से कई बार प्रशासन ने रिहाई के लिए बांड भरने को कह चुका है, लेकिन इन्होंने सशर्त रिहाई से इन्कार किया है। ऐसे में इन्हें श्रीनगर के किसी सरकारी गेस्ट हाऊस में स्थानांतरित किया जाएगा। इनके अलावा तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की मार्च से पहले रिहाई की संभावना कम ही दिखाई दे रही है।

– एजेंसी

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