हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह बनाने के ल‍िए पहली अंतर्राष्ट्रीय Seminar

आगरा। हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह की पहली अंतरराष्ट्रीय Seminar का आज ताजनगरी आगरा में शुभारम्भ हुआ।

आगरा में हिमलायन हिंद महासागर राष्ट्रीय समूह के 54 देशों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक इंद्रेश कुमार ने अन्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ Seminar का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत और अन्य पड़ोसी देशों में भी यूरोपियन देशों की तरह सीमा पर सेना की जगह पुलिस तैनात हो और हथियार की जरूरत ही न पड़े। हिन्द महासागर के इधर का जितना भी क्षेत्र है वो भारत कहलाता था और अब वक्त आ गया है कि वो एक बार फिर भारत कहलाये।

इस दौरान Seminar में आये अन्य देशों के प्रतिनिधियों का उन्होंने सम्मान किया और प्रतिनिधियों ने भारत के इस प्रयास की जमकर सराहना की। इंद्रेश कुमार ने कहा कि जब देश का नेता दूसरे देशों के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशियों की घोषणा करने लगे तो समझ लीजिए कि बस अब देश बदल रहा है। कुछ बातें पुरानी सीखिए और कुछ नए से सीखिए तब ही सही विकास हो पायेगा।

फोरम फार अवेरनेस ऑफ नेशनल सिक्युरिटी (फैन्स) ने आज एक बड़ा प्रयास करते हुए ताजनगरी आगरा के एक पांच सितारा होटल में हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह की पहली अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी का शुभारंभ किया।

दो दिवसीय गोष्ठी की शुरुआत आयोजन के संरक्षक मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के इंद्रेश कुमार ने 15 देशों के प्रतिनिधियों और आगरा में पढ़ रहे विदेशी छात्रों के साथ की।

उद्घाटन सत्र में राज्य मंत्री यूपी सरकार चौधरी उदय भान, सांसद राजकुमार चाहर और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री भवानी सिंह के साथ आगरा की कई दिग्गज हस्तियां मौजूद रही।

उद्घाटन के बाद दो अलग अलग सत्रों में प्रतिनिधियों ने इस विषय पर चर्चा की। सकारात्मक रुख की इस चर्चा के दौरान सभी ने गोष्ठी के आयोजन की सराहना की और भविष्य में यह राष्ट्र समूह बनने की उम्मीद भी जताई।

संस्था के पदाधिकारी रजनीश त्यागी ने कहा कि इस आयोजन के बाद हम सरकार को रिपोर्ट भेजेंगे और पूर्व में सरकार ने हमारी कई मांग मानी हैं तो हमे लगता है इसे भी माना जायेगा। इस कार्य के बाद सभी देशों में व्यापार बढ़ेगा और खुशहाली आएगी।

आयोजन के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने कहा क‍ि दस साल में पाकिस्तान का नाम खत्म होने और बिना हथियार, बिना महिला शोषण और बिना धार्मिक हिंसा और जातिगत भेदभाव के 200 देशों में से 54 देशों में, ज‍िनमें विश्व की कुल आबादी 770 करोड़ में से 320 करोड़ लोगों का एक नया समूह रहता है, को नया रास्ता दिखाने वाला नया भारत पूरे विश्व में वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश देगा।

आगरा फैन्स संस्था द्वारा आयोजित हिमालय-हिन्द महासागर राष्ट्र समूह की अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी में संरक्षक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इंद्रेश कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा क‍ि जहां पीएम मोदी और भारत की उन्नति के गुण गाये तो वहीं पाकिस्तान के पीएम की बात पर भारत के विपक्षी दल के नेताओं को भी समेटते नजर आए।

गोष्ठी के उद्घाटन के बाद आज मीडिया से बातचीत के दौरान पाक पीएम इमरान खान की युद्ध की धमकी के सवाल पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों जगह कॉमन फ्रेंड हैं। पाक में यह इमरान और वाजवा नाम से जाने जाते हैं और भारत में यह दिग्विजय, थरूर, मणिशंकर और ओवैसी के नाम से जाने जाते हैं। यह मानसिक रोग ग्रस्त नेता हैं और हिंसा, गाली गलौच की ही बात करते हैं। इनके परिवार और देश को इनका उपचार कराना चाहिए। यह धीरे धीरे खत्म हो रहे हैं। पाक ने जन्म से हिंसा, द्वेष और खून खराबे को जन्म दिया है। इसी कारण पाक आने वाले दशक में चार पांच देशों में बंट कर खत्म होगा। इसमें पंजाबी, सिंध, बलूच आदि होंगे और पीओके वापस भारत में आ जायेगा। पाकिस्तान अपनी हरकतों से दुनिया के नक्शे से मिटने की ओर बढ़ रहा है। हिन्द महासागर से जुड़े सभी देश पहले भी एक थे। अब उद्देश्य है कि आर्मी बॉर्डर की जगह पुलिस पब्लिक बॉर्डर हो। यह नया समूह 200 देशों में 54 देशों का है और विश्व की 770 करोड़ में से 320 करोड़ लोगों का समूह है। इसमें दुनिया को रास्ता दिखाने वाला नया भारत दिखेगा और , हिंसा, धर्म के भेदभाव, कत्लेआम, नारी शोषण के बिना , प्रदूषण मुक्ति का मार्ग दिखाते हुए विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश देगा।

यह सब कैसे होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जैसे 8 करोड़ महिलाओं को ट्रिपल तलाक से बचाया गया, करोड़ों मुस्लिमों को बर्बाद होने से बचाया। 370 और 35a हटाकर देश को एक किया और जब देश के नेता दूसरे देशों के पीएम की घोषणा करने लगे तो समझ लीजिए देश बदलाव की तरफ है।

धर्मांतरण और घर वापसी की बात पर उन्होंने कहा कि पूरे समूह में 5 प्रतिशत ही ऐसे होंगे जिनकी जड़ें विदेशों में होगी जबकि 99.5 करोड़ की जड़ हिंदुस्तान में ही मिलेगी और यह समय है कि सब अपनी जड़ों से जुड़ जाए और जुड़े रहें।

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