मेघालय की अवैध कोयला खदान में नौसेना के गोताखोरों को मिला पहला शव

भारतीय नौसेना के गोताखोरों को मेघालय की अवैध कोयला खदान में फंसे मजदूरों में से एक का शव मिला है. बताया जा रहा है कि एक मजदूर की डेड बॉडी खदान के 210 फीट अंदर मिली है। भारतीय नेवी के गोताखोरों ने अंडरवॉटर आरओवी का इस्तेमाल करते हुए खदान के 210 फीट अंदर से एक शव को खोज निकाला है। खनिकों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए उच्च क्षमता वाले दो सबमर्सिबल पंपों के जरिए मुख्य शाफ्ट से पानी निकालने की कोशिश नाकाम रही थी।
दिसंबर के महीने में इस कोयला खदान के भीतर 15 मजदूर फंस गये थे.
ये मजदूर 13 दिसंबर को अवैध रैट होल माइंस में कोयला खनन के लिए उतारे गए थे लेकिन जब पास की एक नदी से आया पानी इस खदान में भर गया तो वो यहां फंस गये थे.
नौसेना ने बताया कि पानी के नीचे काम करने वाली एक मशीन को 160 फ़ीट (48 मीटर) की गहराई में यह शव मिला है.
कोयला खदान में फंसे 14 अन्य मजदूरों की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है.
नौसेना ने कहा कि मजदूर का शव डॉक्टरों की देखरेख में खदान से बाहर निकाला गया है.
भारतीय नौसेना ने गुरुवार की सुबह अपने ट्वीट्स में इसकी कुछ डिटेल दी.
खनिकों के रेस्क्यू में मशक्कत कर रहे प्रशासन की मदद के लिए ओडिशा दमकल विभाग का एक दल भी यहां पहुंचा था। इस दल को बचाव कार्य के दौरान तीन हेल्मेट मिले थे।
रैट होल माइंस
खदान में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए बचाव दल में क़रीब 200 को तैनात किया गया है, ये लोग खदान से पानी बाहर निकालने में जुटे हैं.
यह स्पष्ट नहीं है कि कोयला खदान में फंसे अन्य मजदूर जीवित भी हैं या नहीं. शव मिलने से पहले अब तक यहां से केवल तीन हेलमेट मिले हैं.
इससे पहले राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के संयुक्त बचाव प्रयास उपकरणों की कमी के कारण बाधित हुई थी.
शुरू में, खदान से पानी निकालने के लिए बिजली के केवल दो छोटे पंप लगाये गए थे.
370 फ़ीट (112 मीटर) गहरा कोयला खदान जहां ये मजदूर फंसे हुए हैं, सुदूर पूर्वी जयंतिया हिल्स में स्थित है.
रैट होल माइंस में कोयले की खनन के लिए ज़मीन में खोदे गए गड्ढे में संकरा छेद बनाया जाता है और इसमें लगे मजदूरों के लिए बेहद जोखिम भरा होता है.
मजदूरों को बांस की सीढ़ी से रैट होल माइंस में उतारा जाता है और यहां दुर्घटनाएं होना आम है..
रैट होल माइंस पर 2014 में प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन खदान मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले को चुनौती दी.
मेघालय के अवैध खनन के लिए काम करने वाले ज़्यादातर मजदूर प्रवासी हैं जो पैसे कमाने के लिए पड़ोसी राज्यों से आते हैं.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश है और देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में कोयले का 60% का योगदान है, लेकिन कोयला खानों में मजदूरों की कार्य-स्थिति बेहद ख़राब है.
मजदूरों की ज़िंदगी को यहां अक्सर ख़तरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है, साथ ही उनके स्वास्थ्य को लेकर न के बराबर सुरक्षा उपाय हैं.
-BBC

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