अयोध्या विवाद पर बनी फिल्म को Youtube ने हमेशा के लिए प्रतिबंधित किया

मुंबई। आनंद पटवर्धन की अयोध्या विवाद की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म को Youtube ने हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। आनंद पटवर्धन ने अपनी फिल्म को प्रतिबंधित करने का विरोध किया है। वीडियो शेयरिंग वेबसाइट Youtube ने नेशनल अवॉर्ड पा चुकी उनकी फिल्म को सिर्फ 18 साल के ऊपर के लोगों को देखने की इजाजत दी है। पटवर्धन ने दो लंबे फेसबुक पोस्ट के जरिए प्रतिबंध को लेकर नाराजगी जताई है। एक दूसरे टाइटल ‘इन द नेम ऑफ गॉड’ (राम के नाम पुराना टाइटल) के साथ आई यह फिल्म बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले पर आधारित है।
पटवर्धन का मानना है कि धार्मिक असहिष्णुता और घृणा फैलाकर भगवान के नाम पर देश के लोगों को भ्रमित किया गया और वह इसके खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।
पटवर्धन के अनुसार, ‘जब 29 दिसंबर 2014 को मेरी फिल्म दिखाई जा चुकी थी तो अचानक से किसने रिव्यू के लिए हरी झंडी दी और क्यों आयु आधारित पाबंदी लगाई जा रही है?’
Youtube पर फिल्म अब तक 2,86,985 लोगों द्वारा देखी जा चुकी है और बिना प्रॉफिट वाली ऐक्टिविजम कैटिगरी में है।
अपनी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘घिनौना! अगर आप 14 साल से बड़े और 18 साल से कम के हैं तो आपको जोखिम भरे परिश्रम की इजाजत है, लेकिन राम के नाम देखने की अनुमति नहीं है। अल्पकालिक अच्छी खबर यह है कि अगर आप 18 साल से ज्यादा के हैं तो मेरे Youtube चैनल पर इसे देख सकते हैं। यह तब तक है जब तक वे इस पर आगे नई पाबंदियों के बारे में नहीं सोचते हैं।’
पटवर्धन ने जब Youtube इंडिया में इस फैसले के खिलाफ अपील की तो उन्हें जवाब दिया गया, ‘जैसा कि आपको पता होगा कि हमारी कम्युनिटी गाइडलाइंस में साफ किया गया है कि यूट्यूब पर कैसा कॉन्टेंट दिखाने की इजाजत है और कैसा कॉन्टेंट नहीं दिखा सकते। आपका वीडियो राम के नाम हमारे पास रिव्यू के लिए फ्लैग किया गया था। रिव्यू के बाद हमने फैसला किया कि यह सभी दर्शकों के लिए उपयुक्त नहीं है और इसे न्यूनतम 18 वर्ष की पाबंदी के साथ दिखाया जाए।’
पटवर्धन ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘कट्टर हिंदूवादी ताकतें सभी तरह के सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष) कॉन्टेंट की हत्या करना चाहती हैं। यूट्यूब पर एक बार फिर यही देखने को मिला है।’ उन्होंने कहा, ‘ताजा मामले में मेरी फिल्म राम के नाम जिसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने यू सर्टिफिकेट दिया था और हाई कोर्ट के आदेश के बाद 1996 में इसे दूरदर्शन के प्राइम टाइम (रात 9 बजे) में दिखाया गया था, उस पर आयु की पाबंदी थोप दी गई है। फिल्म 28 साल पुरानी है!’
इस बारे में यूट्यूब के प्रवक्ता ने कहा, ‘अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस के तहत हम यूजर की तरफ से फ्लैग गए सभी वीडियोज रिव्यू करते हैं। केस के आधार पर हम उनकी जांच करते हैं। अगर हमारे नियम और शर्तों का उल्लंघन होता है तो ऐसे वीडियो पर आयु का प्रतिबंध लगाया जाता है, जो 18 साल से कम के यूजर्स के लिए अनुचित होते हैं।’
-एजेंसियां

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