दूरदर्शन के मथुरा केंद्र में लगी भीषण आग, करोड़ों रुपए मूल्‍य की संपत्ति का नुकसान

दूरदर्शन के मथुरा केंद्र में लगी भीषण आग, करोड़ों रुपए मूल्‍य की संपत्ति का नुकसान
दूरदर्शन के मथुरा केंद्र में लगी भीषण आग, करोड़ों रुपए मूल्‍य की संपत्ति का नुकसान

मथुरा। प्रसार भारती के मथुरा-वृंदावन रेडियो स्‍टेशन स्‍थित ‘दूरदर्शन’ केन्‍द्र में आज सुबह लगी आग से करोड़ों रुपए की संपत्ति नष्‍ट होने का अनुमान है।
मथुरा-वृंदावन रोड पर मसानी क्षेत्र में प्रसार भारती का आकाशवाणी केंद्र है। इसी केंद्र के एक हिस्‍से में दूरदर्शन केंद्र भी स्‍थापित है।
बताया जाता है आज सुबह करीब 6 बजे केंद्र के किसी कर्मचारी ने दूरदर्शन की बिल्डिंग से आग की लपटें उठती देखीं। कर्मचारी ने तुरंत इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी।
सूचना पाते ही एफएसओ सहित फायर ब्रगेड के जवान मौके पर जा पहुंचे किंतु तब तक बिल्‍डिंग के अधिकांश हिस्‍से में आग फैल चुकी थी। भीषण गर्मी और हवा के प्रवाह ने आग में घी डालने का काम किया जिससे दूरदर्शन केन्‍द्र की बिल्‍डिंग के साथ-साथ वहां मौजूद करोड़ों रुपए मूल्‍य के उपकरण तथा कीमती फर्नीचर आदि सब-कुछ जलकर खाक हो चुका था और आग केंद्र के ऊपरी माले तक जा पहुंची थी।
आश्‍चर्य की बात यह थी कि दूरदर्शन केंद्र में इतनी भयंकर आग लगने के बावजूद केन्‍द्र पर उस वक्‍त कोई जिम्‍मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था अलबत्ता एफएसओ प्रमोद शर्मा ने बताया कि केंद्र में लगे अग्‍निशमन उपकरण काम नहीं कर रहे थे और न ही पानी के टैंक में पानी भरा था जिससे आग को नियंत्रित करने के लिए भारी मशक्‍कत करनी पड़ी।
एफएसओ प्रमोद शर्मा का कहना था कि केंद्र में ऐसी स्‍थित के लिए लगाए गए अग्‍निशमन के उपकरणों का काम न करना स्‍पष्‍ट करता है कि जिम्‍मेदार अधिकारियों द्वारा घोर लापरवाही बरती जा रही थी।
एफएसओ ने कहा कि वह ऐसी स्‍थित के लिए जिम्‍मेदार अधिकारी एवं कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करेंगे।
बताया जाता है कि दूरदर्शन केंद्र में आग लगने की वजह शार्ट सर्किट होना था।
इस पूरे मामले का एक सुखद पहलू यह जरूर रहा कि भयंकर आग लगने और करोड़ों रुपए का नुकसान होने के बावजूद कोई जनहानि नहीं हुई।
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही सूरत (गुजरात) की एक मशहूर इमारत में संचालित कंप्‍यूटर इंस्‍टीट्यूट में आग लगने से कई छात्रों की मौत हो गई थी और तमाम घायल हुए थे।
लापरवाही और नियमों के उल्‍लंघन की वजह से हुए उस भयानक हादसे के बाद देशभर के कंप्‍यूटर कोचिंग सेंटर्स पर अग्‍निशमन के इंतजामों को देखने का अभियान चलाया गया।
इस अभियान से पता लगा कि ज्‍यादातर कोचिंग सेंटर्स की स्‍थितियां एक जैसी हैं और वहां हादसों पर नियंत्रण पाने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
बहरहाल, सूरत का कंप्‍यूटर इंस्‍टीट्यूट चूंकि प्राइवेट स्‍तर पर चलाया जा रहा था लिहाजा उसके संचालकों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्यवाही की गई परंतु आकाशवाणी अथवा दूरदर्शन केंद्र जैसे सरकारी विभागों में तैनात मुलाजिमों का क्‍या, जो न सिर्फ मोटी-मोटी तनख्‍वाह लेते हैं बल्‍कि तमाम सुख-सुविधाएं भी इन्‍हें हासिल होती हैं।
मथुरा के दूरदर्शन केन्‍द्र में हुए करोड़ों रुपए के नुकसान की भरपाई होना तो दूर, इसके लिए जिम्‍मेदार लोगों पर कार्यवाही भी हो जाए तो यह बड़ी बात होगी।
अन्‍यथा होगा ये कि नुकसान का आंकलन करने की आड़ में मनमानी रिपार्ट तैयार की जाएगी। उस रिपोर्ट के आधार पर पुनर्निमाण के लिए पैसा आवंटित होगा। उस पैसे का नए सिरे से बंदरबांट करने की व्‍यवस्‍था की जाएगी ताकि निजी जेंबें भरी जा सकें।
इसके लिए निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर निर्माण कराया जाएगा। उपकरणों की खरीद में सबकी मिलीभगत से खेल होगा और औने-पौने दामों का सामान लगाकर सरकारी पैसे को हजम किया जाएगा।
यह सब इसलिए संभव होगा कि सरकारी विभागों की यही कार्यसंस्‍कृति है और इसी के सहारे ”बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय के सूत्रवाक्‍य को सार्थक किया जा रहा है।
-Legend News

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