KDDC में डेंटल इम्प्लांट व लेजर का फैलोशिप कोर्स जिनोवा विवि से शुरु

मथुरा। KDDC ने जिनोवा विश्वविद्यालय, इटली के साथ समझौते के अन्तर्गत इम्प्लान्ट और दन्त लेजर की फेलोशिप कोर्स की शुरूआत की। इस कोर्स में देश-विदेश के आये छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया। दंत लेजर में डा. एलेक्स मैथ्यूज और डा. फैस्सिको मैनकाॅनी और इम्प्लांट में डा. विकास गौड, डा. क्लाउडी मोडेना ने प्रशिक्षण दिया। इससे अब मथुरा स्थित केडी डेन्टल काॅलेज एण्ड हाॅस्पीटल मथुरा में ही इम्प्लान्ट एवं लेजर तकनीकी द्वारा दाँतों का इलाज किया जायेगा। इस फेलोशिप कोर्स की कार्यशाला में 50 मरीजों का लेजर तकनीकी द्वारा दांतों के मसूड़ों व अन्य समस्याओं का समाधान किया गया।

आरके एजुकेशन हब के चैयरमेन डा. रामकिशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल बोले-नोर्थ इंडिया में किसी विदेशी यूनीवर्सिटी से फैलोशिप का पहला समझौता

केडी डेंटल कालेज के प्रधानाचार्य डा. मनेश लाहोरी ने बताया कि जिनोवा विश्वविद्यालय, इटली के साथ हुए समझौते के तहत दुबई, यूएई और भारत के छात्र-छात्राओं के फैलोशिप का यह प्रोग्राम नोर्थ इंडिया और केडी डेंटल कालेज एंड हास्पीटल के इतिहास में पहली बार शुरु हुआ है। केडी डेंटल कालेज और इटली के प्रोफेसर इन छात्र-छात्राओं को दंत चिकित्सा की नवीनतम तकनीकों को समझाएंगे। इन तकनीकों में आर्टिफिशियल डेंटल इम्प्लांट और डेंटल लेजर प्रमुख रुप से होगी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डा. मनेश लाहोरी, डा. गोपा कुमार, डा. राहुल नागरथ, डा. तरुण महाजन, डा. शैलेंद्र चैहान, डा. सत्येंद्र शर्मा, डा. अजय नागपाल ने विशेष योगदान दिया।

KDDC में आयोजित फेलोशिप कोर्स की कार्यशाला में 50 मरीजों का लेजर तकनीकी द्वारा दांतों के मसूड़ों और अन्य समस्याओं का किया समाधान

आरके एजुकेशन हब के चैयरमेन डा. रामकिशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि केडी डेंटल कालेज अपनी क्वालिटी एजूकेशन के लिए जाना जाता है। यहां विदेशों से छात्र-छात्रा फैलोशिप के तहत पढेंगे ये कालेज के लिए गर्व की बात होगी। नोर्थ में किसी डेंटल कालेज ने किसी विदेशी यूनीवर्सिटी से फैलोशिप का समझौता हुआ है। जिसके तहत कई देशों के बच्चे यहां आकर दंत चिकित्सा की नवीनतम तकनीकों को सीख रहे हंै।

ये होती हैं डेंटल इम्प्लान्ट और लेजर तकनीक
डेंटल इम्प्लान्ट दांतों के इलाज की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें दांत ना होने पर हड्डी में एक पेच लगाकर दांत की कृत्रिम जड़ बनायी जाती है। उसके ऊपर कृत्रिम दांत लगा दिया जाता है। जबकि दन्त लेजर एक प्रकार का लेजर है, जो विशेष रूप से दन्त चिकित्सा में उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। दन्त लेजर से रक्तस्त्राव कम होता है। जीवाणु संक्रमण कम हो जाता है। आसपास के ऊतकों को नुकसान कम होता है। साथ ही घाव तेजी से ठीक हो जाता है।

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