संस्कृति यूनिवर्सिटी की चार छात्राएं बनी Fashion Designer

साल का आखिरी दिन Fashion Designer शशांक के लिए भी लाया नौकरी का पैगाम

मथुरा। विदा लेते साल का आखिरी दिन संस्कृति यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फैशन डिजाइनिंग के पांच Fashion Designer छात्र-छात्राओं के लिए नई सौगात लेकर आया। सोमवार को गुरुग्राम की हाउस ऑफ स्पैरो और नोएडा की गिन्नी फिलामेंट लिमिटेड कम्पनियों के पदाधिकारियों ने संस्कृति यूनिवर्सिटी की स्कूल ऑफ फैशन डिजाइनिंग की छात्रा नवनी अग्रवाल, मोनिका अत्री, प्रियंका सिंह, याशिका वार्ष्णेय और छात्र शशांक शर्मा को फैशन डिजाइनर के पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस सफलता से छात्र-छात्राएं ही नहीं उनके अभिभावक भी काफी प्रसन्न हैं। छात्राओं का कहना है कि शिक्षा पूरी करने से पहले किसी बड़ी कम्पनी में सेवा का अवसर मिलना हमारे सुनहरे भविष्य का संकेत है।

आज के समय में फैशन डिजाइनिंग में करियर के अच्छे अवसर हैं। मथुरा में संचालित संस्कृति यूनिवर्सिटी का स्कूल आफ फैशन डिजाइनिंग विभाग उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के चलते युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है। इस साल अब तक आधे से अधिक छात्र-छात्राओं को किसी न किसी बड़ी कम्पनी में सेवा का अवसर मिल चुका है। सोमवार 31 दिसम्बर को गुरुग्राम की हाउस ऑफ स्पैरो कम्पनी ने बीए फैशन डिजाइनिंग की छात्रा नवनी अग्रवाल, मोनिका अत्री, शशांक शर्मा तथा डिप्लोमा फैशन डिजाइनिंग की प्रियंका सिंह को फैशन डिजाइनर पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए वहीं नोएडा की गिन्नी फिलामेंट लिमिटेड कम्पनी ने याशिका वार्ष्णेय को अपने यहां इसी पद पर सेवा का अवसर प्रदान किया है। एक साथ पांच छात्र-छात्राओं की इस सफलता पर प्राध्यापक अंजली भारद्वाज का कहना है कि फैशन डिजाइनिंग की पहली योग्यता तो क्रिएटिविटी है। फैशन डिजाइनिंग के छात्र-छात्राओं को रंगों और डिजाइन के साथ हमेशा कुछ न कुछ नया एक्सपेरीमेंट करना होता है। इतना ही नहीं उनमें क्रिएटिविटी के साथ अच्छी कम्युनिकेशन स्किल भी होनी चाहिए तथा उन्हें फैशन जगत से रूबरू रहना भी जरूरी है। अंजली बताती हैं कि संस्कृति यूनिवर्सिटी में बैचलर इन फैशन डिजाइनिंग,  डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग तथा मास्टर इन फैशन डिजाइनिंग में छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्रदान की जाती है।

कुलाधिपति सचिन गुप्ता का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी के शैक्षिक पाठ्यक्रमों में आधुनिक टेक्निक और प्रोसेस को समाहित किया गया है। संस्कृति यूनिवर्सिटी में शिक्षा के क्षेत्र में आगामी बीस वर्षों की एक प्रभावी नीति को दृष्टिगत रखते हुए काम किया जा रहा है। उपकुलाधिपति राजेश गुप्ता का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी का व्यावसायिक एजेंसियों से सीधा अनुबंध है। संस्कृति यूनिवर्सिटी ने समय के साथ चलने और इसके लिए जरूरी उपायों को करने में तत्परता एवं अभिरुचि दिखाई है। शिक्षा को लेकर हमारी सोच इन्हीं पहलुओं पर केन्द्रित है। इस सफलता के लिए कुलाधिपति सचिन गुप्ता, उप-कुलाधिपति राजेश गुप्ता, कार्यवाहक निदेशक पी.सी. छाबड़ा, कुलपति डा. राणा सिंह तथा ओएसडी मीनाक्षी शर्मा ने छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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