प्रसिद्ध साहित्यकार व कवि बालकवि बैरागी का निधन

नई दिल्ली। पूर्व राज्यसभा सांसद और देश के प्रसिद्ध साहित्यकार व कवि बालकवि बैरागी का रविवार शाम निधन हो गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने निवास स्थान कवि नगर पर अंतिम सांस ली है। वह 87 वर्ष के थे। बता दें कि बैरागी जी जन्म मंदसौर जिले की मनासा तहसील के रामपुर गांव में 10 फरवरी 1931 को हुआ। वह साहित्य और कविता के साथ-साथ राजनीति के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय रहे। राजनीति में सक्रिय रहने के कारण बैरागी की कविताओं में स्वाभाविक रूप से राजनीति की झलक मिलती है।
उल्लेखनीय है कि बालकवि बैरागी को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था। बैरागी जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। मध्यप्रदेश में अर्जुन सिंह सरकार में खाद्यमंत्री भी रहे। गीत, दरद दीवानी, दो टूक, भावी रक्षक देश के, आओ बच्चो गाओ बच्चो इनकी रचनाएं हैं।
जानकारी के मुताबिक रविवार को नीमच में एक कार्यक्रम में शामिल होकर वह मनासा पहुंचे। उसके कुछ देर बाद ही उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य और सियासी जगत में शोक की लहर है। राजनीतिक हस्तियां लगातार उनके निवास पर पहुंच रही हैं।
बालकवि बैरागी का सरल हृदय और हंसमुख व्यवहार आम लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता था। बैरागी ने विक्रम विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए किया था।
दल बदलू राजनीति…अपनी गंध नहीं बेचूंगा-बालकवि बैरागी
राजनीति में दल बदलने के इस दौर में बालकवि बैरागी की कविता ‘अपनी गंध नहीं बेचूंगा’ वर्तमान में काफी प्रासंगिक है। लिहाजा हम इसे अपने पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं…

चाहे सभी सुमन बिक जाएं
चाहे ये उपवन बिक जाएं
चाहे सौ फागुन बिक जाएं
पर मैं गंध नहीं बेचूंगा-अपनी गंध नहीं बेचूंगा…

सूरज जिसका सर सहलाए उसके सर को नीचा कर दूं?
मुझसे ज्यादा अहं भरी है ये मेरी सौरभ अलबेली
नहीं छूटती इस पगली से नीलगगन की खुली हवेली
सूरज जिसका सर सहलाए उसके सर को नीचा कर दूं?
ओ प्रबंध के विक्रेताओ
महाकाव्य के ओ क्रेताओ
ये व्यापार तुम्हीं को शुभ हो, मुक्तक छंद नहीं बेचूंगा
अपनी गंध नहीं बेचूंगा- चाहे सभी सुमन बिक जाएं।
-एजेंसी

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