साल के पहले दिन पैदा हुए थे उर्दू के मशहूर शायर राहत इंदौरी

उर्दू के मशहूर शायर और गीतकार राहत इंदौरी का जन्म साल के पहले दिन इंदौर में सन् 1950 को हुआ था। इसी साल कोरोना काल में राहत इंदौरी की मृत्‍यु हो गई। वह कपड़ा मिल के कर्मचारी रफ्तुल्लाह कुरैशी और मकबूल उन निशा बेगम की चौथी संतान थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर में हुई। उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से 1973 में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 1975 में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से उर्दू साहित्य में एमए किया। तत्पश्चात 1985 में मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
राहत इंदौरी ने शुरुआती दौर में इंद्रकुमार कॉलेज, इंदौर में उर्दू साहित्य का अध्यापन कार्य शुरू कर दिया। उनके छात्रों के मुताबिक वह कॉलेज में सबसे अच्छे व्याख्याता थे। फिर बीच में वो मुशायरों में बहुत व्यस्त हो गए और पूरे भारत से और विदेशों से निमंत्रण प्राप्त करना शुरू कर दिया। अनमोल क्षमता, कड़ी लगन और शब्दों की कला की एक विशिष्ट शैली थी उन्‍हें बहुत जल्द जनता के बीच अत्यन्त लोकप्रिय बना दिया। राहत इंदौरी ने देखते ही देखते लोगों के दिलों में अपने लिए एक खास जगह बना ली और तीन से चार साल के भीतर ही उनकी कविता की खुशबू ने उन्हें उर्दू साहित्य की दुनिया में एक प्रसिद्ध शायर बना दिया था। वह न सिर्फ पढ़ाई में प्रवीण थे बल्कि वो खेलकूद में भी प्रवीण थे। वे स्कूल और कॉलेज स्तर पर फुटबॉल और हॉकी टीम के कप्तान भी थे। वह केवल 19 वर्ष के थे जब उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में अपनी पहली शायरी सुनाई थी।
राहत मोहब्बत को आदमी का हक़ मानते हैं। लिहाजा उनके शेर वजनदार होते हैं।
जैसे-
उस की याद आई है सांसों ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है

अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते

भुलादे मुझको मगर, मेरी उंगलियों के निशान
तेरे बदन पे अभी तक चमक रहे होंगे
-एजेंसियां

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