प्रसिद्ध साहित्यकार मैत्रेयी पुष्पा का जन्‍मदिन आज

हिंदी की प्रसिद्ध साहित्यकार मैत्रेयी पुष्पा का आज जन्‍मदिन है। उनका जन्‍म 30 नवंबर 1944 के दिन उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिला अंतर्गत सिर्कुरा नामक गाँव में हुआ था।
हिन्दी अकादमी दिल्ली की उपाध्यक्ष रहीं मैत्रेयी पुष्पा ने अपनी लेखनी से ग्रामीण भारत को साकार किया। उनके लेखन में ब्रज और बुंदेल दोनों संस्कृतियों की झलक दिखाई देती है क्‍योंकि उनके जीवन का आरंभिक भाग बुंदेलखण्ड में व्यतीत हुआ था। उनकी आरंभिक शिक्षा झांसी ज़िले के खिल्ली गाँव में हुई। उन्होंने अपनी एम. ए. (हिंदी साहित्य) की डिग्री बुंदेलखंड कॉलेज, झाँसी से प्राप्त की थी। उन्हें राष्ट्रीय सहारा, वनिता जैसी पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर सक्रिय लेखन का अनुभव रहा है।
मैत्रेयी पुष्पा को रांगेय राघव और फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ की श्रेणी की रचनाकार माना जाता है।
मुख्य रचनाएँ:
‘कस्तूरी कुंडली बसैं’, ‘बेतवा बहती रही’, ‘स्मृति दंश’, ‘फैसला’, ‘सिस्टर’, ‘अब फूल नहीं खिलते’, गुड़िया भीतर गुड़िया (आत्मकथा) आदि।
-एजेंसियां

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