पर्वतीय शैली की मशहूर लोक गायिका Kabutri Devi का निधन

नई दिल्ली/पिथौरागढ़। 70 के दशक की पर्वतीय लोक शैली गायिका Kabutri Devi का आज निधन हो गया, इन्होंने पहली बार पहाड़ के गांव से स्टूडियो पहुंचकर रेडियो जगत में अपने गीतों से धूम मचा दी थी।
उत्तराखंड की मशहूर लोक गायिका कबूतरी देवी को सांस लेने में तकलीफ की वजह से कबूतरी देवी पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में भर्ती थीं। वो 72 साल की थीं।

Kabutri Devi के निधन की खबर सामने आने के बाद उनका परिवार और प्रशंसक शोक में डूब गए।  गायन की कई विधाओं में माहिर लोक गायिका राज्य की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन देश भर में कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कबूतरी देवी के निधन पर शोक जताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।

जानकारी के मुताबिक, पिथौरागढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती थी। उन्हें देहरादून ले जाने के लिए गत शाम से हेलीकॉप्टर का इंतजार होता रहा। धारचूला से हवाई पट्टी पर हेलीकॉप्टर के न पहुंच पाने के कारण वो इलाज के लिए हायर सेंटर नहीं जा पाई।  इस दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें वापस जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद उनका निधन हो गया।

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कबूतरी देवी ने पर्वतीय लोक शैली को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया था। उत्तराखंड की तीजनबाई कही जाने वाली कबूतरी देवी ने पहली बार दादी-नानी के लोकगीतों को आकाशवाणी और प्रतिष्ठित मंचों के माध्यम से प्रचारित और प्रसारित किया था। जब इन्होंने आकाशवाणी पर गाना शुरू किया, जब तक कोई महिला संस्कृतिकर्मी आकाशवाणी के लिए नहीं गाती थीं।

70 के दशक में इन्होंने पहली बार पहाड़ के गांव से स्टूडियो पहुंचकर रेडियो जगत में अपने गीतों से धूम मचा दी थी। कबूतरी देवी ने आकाशवाणी के लिए करीब 100 से अधिक गीत गाए। जीवन के लगभग 20 साल अभावों में बिताने के बाद 2002 से उनकी प्रतिभा को उचित सम्मान मिलना शुरू हुआ जिनको बाद में समय-समय पर कई सम्मानों ने नवाजा गया. उनके निधन से उनके प्रशंसक शोक में डूबे हैं।

-एजेंसी

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