KD मेडिकल काॅलेज में विशेषज्ञ psychiatrist ने साझा किए विचार

मथुरा। KD मेडिकल काॅलेज-हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आज हुई कार्यशाला के दौरान दिल्ली, लखनऊ और आगरा से आए विशेषज्ञ psychiatrist ने चिकित्सकों और मेडिकल छात्र-छात्राओं से अपने विचार साझा किए। कार्यशाला में psychiatrist ने डाॅक्टर्स और मेडिकल छात्र-छात्राओं की मनोविकार से सम्बन्धित शंकाओं का भी समाधान किया।

बदलाव के इस दौर में लोगों की मानसिक सोच में भी काफी चेंजिंग देखी जा रही है। हर चार में से एक व्यक्ति किसी न किसी मोड़ पर मानसिक विकारों से प्रभावित है। अक्सर जिन लोगों को हम आमभाषा में भावुक कह देते हैं, वैसे लोग अब मानसिक रोगी बन रहे हैं। अवसाद में इजाफा होने के कारण समाज में आत्महत्या के प्रकरण भी लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में हम सही सोच और सही परामर्श से मानसिक अवसाद से मुक्ति पा सकते हैं।

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट IMHH आगरा के डाॅ. दिनेश राठौर ने सिजोफ्रेनिया जैसी गम्भीर मानसिक बीमारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिजोफ्रेनिया के मरीज वास्तविक दुनिया से कट जाते हैं। इस बीमारी से ग्रसित दो मरीजों के लक्षण हर बार एक जैसे नहीं होते। ऐसे में इस बीमारी का पता लगाना कठिन हो जाता है। सिजोफ्रेनिया के मरीजों में कुछ विशेष तौर से दिखने वाले लक्षण कैटेटोनिक कहे जाते हैं। इसमें व्यक्ति ज्यादा चलता फिरता नहीं तथा अपनी ही धुन में मस्त रहता है, ऐसे लोगों को हम मोटीवेट कर मनोविकार से मुक्ति दिला सकते हैं। डी.एम. डी-एड्यूशन एआईआईएमएस नई दिल्ली के डाॅ. मोहित वार्ष्णेय ने नशे की लत से होने वाले मनोविकारों पर प्रकाश डाला। डाॅ. वार्ष्णेय ने कहा कि दवाओं के माध्यम से नशे की लत को कम तो किया जा सकता है लेकिन इससे पूर्ण छुटकारा आपका आत्मबल ही दिला सकता है। नशे की लत का शिकार लोगों के लिए साइकोथेरिपी सबसे कारगर उपाय है।

मनोचिकित्सक डाॅ. गौरव सिंह ने बताया कि हर आदमी को जब लगे कि वह अपने अंदर कुछ कमी महसूस कर रहा है, उसकी काम करने की क्षमता कम हो रही है, तो उसे मनोचिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। डाॅ. सिंह का कहना है कि अवसाद में ज्यादा समय तक रहने और समय पर इलाज न होने से बीमारी बढ़ जाती है। इससे मरीज सेवियर डिप्रेशन विद साइकॉटिक सिप्टम में पहुंच जाता है, जहां उसमें आत्महत्या करने की इच्छा प्रबल हो जाती है। विभागाध्यक्ष मेयो मेडिकल कालेज लखनऊ डाॅ. पीयूष चौहान का कहना है कि लम्बे समय से सेवियर डिप्रेसिव डिसऑर्डर, डिप्रेसिव डिसऑर्डर या एपिसोड और एंग्जाइटी डिसऑर्डर से पैनिक अटैक आते हैं तथा आत्महत्या की इच्छा होती है। डाॅ. श्वेता चौहान ने कहा कि अकेले में बातें करना, फील करना कि कोई उनके पीछे खड़ा है या उसके शरीर पर आत्मा का वास है या फिर भगवान का शरीर पर आना, इस तरह के केस ज्यादातर महिलाओं में देखे जा सकते हैं। दरअसल, यह एक तरह की मानसिक बीमारी है, जिसका इलाज सम्भव है।

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