30 जून के बाद monsoon में अच्छी मजबूती की उम्मीद

नई दिल्‍ली। मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के. साथी देवी का कहना है, “हम 30 जून के बाद monsoon में अच्छी मजबूती की उम्मीद कर रहे हैं। इस बात की काफी उम्मीद है कि monsoon मध्य भारत और गुजरात के बाकी हिस्सों की ओर बढ़ेगा।”

जुलाई में कम दबाव के चलते monsoon के बेहतर होने की उम्मीद है। जुलाई का महीना खरीफ की फसल की बुआई के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस महीने को सबसे अधिक बारिश वाला महीना भी माना जाता है।

कैसे प्रभावित होता है मानसून?
अल-नीनो के प्रभावित रहने से पूर्वी और मध्य प्रशांत महासागर की सतह में असामान्य रूप से गर्मी की स्थिति रहती है। जिससे हवाओं का चक्र प्रभावित होता है। ये चक्र भारतीय मानसून पर विपरीत प्रभाव डालता है।

मराठवाड़ा और विदर्भ में बारिश

मौसम वैज्ञानिकों ने अल-नीनो के देर से सक्रिय होने की आशंका पहले ही जता दी थी वहीं बीते सप्ताह की स्थिति में सुधार हुआ है और लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे क्षेत्रों जैसे मराठवाड़ा और विदर्भ में बारिश हुई है। अब बताया जा रहा है कि 30 जून तक बंगाल की खाड़ी में कम दबाव की स्थिति बन सकती है। जिससे अगले महीने के पहले हफ्ते में ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर पश्चिम भारत में अच्छी बारिश हो सकती है।

पांचवां सबसे सूखा जून
इस साल जून माह में भीषण गर्मी देखने को मिली है। मौसम विभाग के अनुसार ये बीते 100 साल में पांचवां सबसे सूखा जून था। इस पूरे महीने में बारिश औसत से 35 फीसदी कम रही है। आमतौर पर इस महीने में 151 मिलीमीटर बारिश होती है लेकिन इस बार ये आंकड़ा 97.9 मिलीमीटर ही रहा है।

कमजोर रहा मानसून
संभावना है कि इस महीने का अंत 106 से 112 मिलीमीटर बारिश के साथ हो सकता है। इससे पहले 2009 में सबसे कम 85.7 मिलीमीटर, 2014 में 95.4 मिलीमीटर, 1926 में 98.7 मिलीमीटर और 1923 में 102 मिलीमीटर बारिश हुई थी। 2009 और 2014 ऐसे साल थे, जब अल-नीनो के प्रभाव के चलते मानसून कमजोर रहा। इस साल भी ऐसी ही स्थिति बताई जा रही है।

-एजेंसी

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