मेरठ में विदेशी व्‍यापारियों ने चला रखी हैं अवैध Meat फैक्‍ट्रियां

मेरठ। योगी सरकार द्वारा अवैध Meat फैक्‍ट्रियों पर रोक लगाए जाने के बाद भी विदेशी व्‍यापारियों द्वारा मेरठ के दूर दराज के खेतों में Meat की ना सिर्फ फैक्‍ट्रियां लगी हैं बल्‍कि मीट को अवैध रूप से एक्‍सपोर्ट भी किया जा रहा है।

अमर उजाला की खबर के अनुसार म्यांमार के एक कारोबारी ने मेरठ में Meat कारोबार का बड़ा जाल बिछा दिया है। अलीपुर के जंगल में बड़ी मीट फैक्ट्री लगाई है। एमडीए, नगर निगम, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड समेत तमाम अन्य विभागों की स्वीकृति के बिना ही मीट बाहर भेजा जा रहा है। लेकिन सरकारी विभागों के अफसर आंखें बंद कर बैठे हैं।

हैरत की बात है कि वर्तमान सरकार ने अवैध रूप से चल रही मीट फैक्ट्रियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई कराई, इसके बाद भी मेरठ में यह धंधा फल फूल रहा है।

अमर उजाला की इसी खबर में बताया गया है कि मेरठ में मीट एक्सपोर्ट का बड़ा कारोबार है। सूबे में नई सरकार बनते ही प्रदेश भर में अवैध मीट फैक्ट्रियों के खिलाफ अभियान चलाया गया था। मेरठ में भी प्रशासनिक अमले ने छापेमारी कर मीट की अवैध फैक्ट्रियों को सील कर दिया था। केवल तीन फैक्ट्रियों को बाद में स्वीकृति दी गई, जो मीट का एक्सपोर्ट कर रही हैं। इसके अलावा यहां चल रही सभी फैक्ट्रियां अवैध की श्रेणी में हैं।

विदेशी कारोबारी ने झोंकी ताकत
अभी तक मेरठ में स्थानीय लोग ही मीट का कारोबार कर रहे थे। लेकिन अब विदेशी कारोबारी भी इस धंधे में कूद पड़े हैं। म्यांमार के एक कारोबारी ने अलीपुर पीपलीखेड़ा के जंगल में कई सौ बीघा जमीन खरीदी और यहां मीट फैक्ट्री लगा दी। यह एक ओफल्स प्रसंस्करण इकाई है। यानी पशुओं के अवशेषों को प्रसंस्कृत कर उसकी पैकिंग की जाती है और बाहर भेजा जाता है। इस फैक्ट्री के पास मीट एक्सपोर्ट की कोई मंजूरी नहीं है।

25 से तीस मीट्रिक टन रोजाना का धंधा
अधिकतर स्लाटर हाउस से इस फैक्ट्री में वेस्टेज लाया जाता है और यहां इसे प्रसंस्कृत किया जाता है। रोज यहां 25 से तीस मीट्रिक टन माल का कारोबार किया जा रहा है।

आरटीआई में खुलेंगे राज
इस पूरे प्रकरण पर कई लोगों ने आरटीआई भी लगाई है। सारे दस्तावेज मांगे हैं। एडवोकेट, काजी शादाब, एडवोकेट अब्दुल वहाब आदि ने भी इसकी शिकायत की है और पूरी जानकारी मांगी है। यहां तक कि क्षेत्र की मीट फैक्ट्रियों में पेश चिकित्साधिकारियों की तैनाती पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि नियमानुसार ये गलत तैनात किए जा रहे हैं। इन्हीं की देखरेख में ही सारा काम चल रहा है।

कैसे बन गई इमारत
इतनी बड़ी फैक्ट्री कैसे बन गई और एमडीए अधिकारियों को दिखाई भी नही दी। एमडीए ने एक तरफ अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चला रखा है और दूसरी तरफ इस तरह के निर्माण हो रहे हैं। हालांकि वीसी साहब सिंह ने इस फैक्ट्री के तमाम दस्तावेज तलब किए हैं।

इन विभागों की चाहिए मीट एक्सपोर्ट को मंजूरी
जिला प्रशासन, मेरठ विकास प्राधिकरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पशुपालन विभाग, जिला पंचायत या नगर निगम, एफएसएसएआई, एपीडा, फायर ऑफिसर, जिला उद्योग केन्द्र। जिला उद्योग केन्द्र में इस संस्था का रजिस्ट्रेशन भर है। इसके अलावा अन्य किसी विभाग की कोई एनओसी नहीं है।

जिलाधिकारी मेरठ अनिल ढींगरा ने कहा कि यह प्रकरण मेरी जानकारी में आया है। एक बार इसकी जांच कराई लेकिन अब नई इमारत बन जाने की बात आई है। मैं फिर से इसकी जांच कराता हूं। यदि गैरकानूनी काम हो रहा है तो तत्काल एक्शन होगा।
-एजेंसी

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