करगिल युद्ध के समय हथियारों की खरीद में हर देश ने किया भारत का शोषण: वीपी मलिक

चंडीगढ़। करगिल युद्ध के 20 साल बाद भी इससे जुड़े नए-नए तथ्‍य सामने आने का सिलसिला जारी है। भारतीय सेना के तत्‍कालीन प्रमुख जनरल (रिटायर) वीपी मलिक ने दावा किया है कि करगिल युद्ध के समय भारत को विदेशों से हथियार और गोला बारूद मंगाना पड़ा था लेकिन इन देशों ने मदद की बजाय बाजार की दर से बहुत ज्‍यादा दाम पर पैसा वसूला और भारत को तीन साल पुराने सैटलाइट पिक्‍चर दिए।
जनरल मलिक ने मेक इन इंडिया को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि करगिल युद्ध के समय भारत को हथियार और गोला बारूद की सख्‍त जरूरत थी लेकिन इन देशों ने मदद के नाम पर घटिया सामग्री दी।
उन्‍होंने कहा, ‘करगिल युद्ध के समय हरेक अर्जेंट खरीदारी चाहे में वह किसी भी देश से की गई हो, उसने भारत का उतना शोषण किया जितना वह कर सकता था। हमने एक देश से कुछ तोपें मांगीं तो उसने शुरू में देने का वादा किया लेकिन उसने बाद में पुरानी तोपों को मरम्‍मत करके भारत को दे द‍िया।’
‘3 साल पुराने एक सैटलाइट इमेज के लिए 36 हजार’
उन्‍होंने कहा, ‘हमें कुछ गोला बारूद की जरूरत थी और हमने एक अन्‍य देश से संपर्क किया तो हमें 1970 के दशक के गोला बारूद दे द‍िए गए।’
जनरल मलिक ने खुलासा किया कि भारत को हरेक सैटलाइट इमेज के लिए 36 हजार रुपये देने पड़े। इतना पैसा देने के बाद भी भारत को नए की बजाय 3 साल पुराने सैटलाइट इमेज द‍िए गए। मलिक ने कहा कि भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जरूरी हथियार नहीं दे पाते हैं इसलिए हमें विदेशों से यह मंगाना पड़ता है।
जनरल मलिक ने कहा कि जब तक भारत आत्‍मनिर्भर नहीं होगा तब तक हमारे सुरक्षा बल असुरक्षित बने रहेंगे। उन्‍होंने कहा, ‘आज के समय में तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है और हमारे सिस्‍टम की गड़बड़ी यह है कि जब तक तकनीक सुरक्षा बलों तक पहुंचती है, वह पुरानी हो जाती है।’ पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि भारत में पब्लिक सेक्‍टर को बहुत ज्‍यादा संरक्षण दिया गया है और निजी क्षेत्र को समान हक नहीं मिला है।
-एजेंसियां

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