दुनियाभर की एयरलाइन कंपनियों को 113 अरब डॉलर तक के नुकसान का अनुमान

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस का असर बढ़ते रहने पर दुनियाभर की एयरलाइन कंपनियों को 113 अरब डॉलर तक के पैसेंजर रेवेन्यू का लॉस हो सकता है।
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने यह अनुमान लगाते हुए कहा है कि इंडस्ट्री पर इसका असर 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस जितना हो सकता है।
एयरलाइन बॉडी के मुताबिक अगर संक्रमण मौजूदा स्तर पर बना रहता है तो टोटल पैसेंजर रेवेन्यू लॉस 63 अरब डॉलर का रह सकता है। IATA ने इससे पहले 20 फरवरी को कोरोना वायरस के चलते 29.3 अरब डॉलर का रेवेन्यू लॉस होने का अनुमान दिया था। उसने यह आंकड़ा वायरस का असर चीन से जुड़े बाजारों तक सीमित रहने के अनुमान पर दिया था।
113 अरब के रेवेन्यू लॉस का अनुमान
IATA ने मंगलवार को जारी बयान में कहा था, ‘तब से अब तक कोरोना वायरस 80 से ज्यादा देशों में फैल चुका है और चीन के अलावा दूसरे रूट्स पर भी फॉरवर्ड बुकिंग पर नेगेटिव असर हुआ है। फाइनेंशियल मार्केट्स ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एयरलाइन कंपनियों के शेयरों का दाम कोरोना का संक्रमण फैलना शुरू होने समय से अब तक लगभग 25% तक टूट चुका है। यह 2003 में सार्स क्राइसिस के दौरान आई गिरावट के मुकाबले लगभग 21 पर्सेंटेज प्वाइंट ज्यादा है। एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में गिरावट हमारे पिछले एनालिसिस के मुकाबले ज्यादा रेवेन्यू लॉस होने के आशंका के चलते पहले ही आ चुकी है।’
कोरोना का असर 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस जितना: IATA
बयान के मुताबिक IATA के डायरेक्टर जनरल एलेक्सांद्र दे यूनियाक कहते हैं, ‘बहुत सी एयरलाइन लागत घटाने के लिए कंपनियां कैपेसिटी घटा रही हैं और आपात उपाय कर रही हैं। सरकारों को भी अपनी तरफ से कोशिश करनी चाहिए। एयरलाइन अपना वजूद बचाए रखने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं क्योंकि ये वर्ल्ड इकनॉमी को कनेक्ट करने में अहम रोल अदा करते हैं। सरकारे राहत पैकेज लाने पर विचार कर रही हैं, एयरलाइन इंडस्ट्री को टैक्स, चार्ज और स्लॉट एलोकेशन के मोर्चे पर राहत देने की जरूरत होगी। यह बहुत मुश्किल समय है।’ IATA ने बताया कि कार्गो ऑपरेशंस पर पड़े असर का आंकलन उसके पास नहीं है।
-एजेंसियां

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