शत्रु संपत्ति: महमूदाबाद के राजा की हैं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में करीब 936 संपत्तियां

Enemy Property: The King of Mahmudabad has about 936 properties in Uttar Pradesh and Uttarakhand
शत्रु संपत्ति: महमूदाबाद के राजा की हैं उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में करीब 936 संपत्तियां

लखनऊ। मंगलवार को संसद में शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया। इस बिल का कई परिवारों पर असर होगा। केवल उत्तर प्रदेश को ही ले लें, तो कम से कम 1,519 संपत्तियां ऐसी हैं, जिनका मालिकाना हक इस बिल के पास होने से प्रभावित होगा। सबसे ज्यादा असर पड़ेगा महमूदाबाद के राजा पर। उनके पिता अमीर अहमद खान 1957 में पाकिस्तान चले गए थे लेकिन उनकी पत्नी और बेटा यहीं भारत में रह गए। महमूदाबाद के राजा के पास उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में करीब 936 संपत्तियां हैं। नया संशोधन बिल पास होने के बाद उनके परिवार का इन संपत्तियों पर मालिकाना हक खत्म हो जाएगा।
इस अधिनियम के बन जाने के बाद सभी ‘शत्रु संपत्तियों’ का नियंत्रण केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त संरक्षकों के पास चला जाएगा। पुश्तैनी जायदाद पर परिवार के वारिसों का अधिकार खत्म हो जाएगा। उत्तर प्रदेश की 1519 शत्रु संपत्तियों में कम से कम 622 ऐसे हैं, जिन्हें संरक्षकों के हवाले किया जा चुका है। 897 संपत्तियां ऐसी हैं, जिनके संरक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।
सूत्रों ने बताया कि फिलहाल इस बिल को आगे की प्रक्रिया के लिए विधि निर्माण शाखा के पास भेजा जाएगा। मुंबई स्थित मुख्यालय से दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही संरक्षकों की भूमिका शुरू हो सकेगी।
महमूदाबाद के राज परिवार की बात करें तो साल 2005 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद उनकी कई संपत्तियां उन्हें सौंप दी गई थीं। इसके लिए राजपरिवार ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। फिर 2010 में शत्रु संपत्ति अध्यादेश के ऐलान के बाद फिर से इन संपत्तियों का अधिकार सरकारी संरक्षक के पास चला गया। इस फैसले के खिलाफ राजा ने एक बार फिर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने इस अध्यादेश को भारतीय संविधान के बुनियादी अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसके खिलाफ अपील की। बिल पर प्रतिक्रिया करते हुए राजा की ओर से कहा, ‘सरकार इस बिल को पारित करवाने की जल्दी में थी। इसका मकसद समाज के एक विशेष धड़े को खुश करना है। समाज का एक खास तबका कुछ विशेष किस्म के हिंदुत्व विचार रखता है, लेकिन बहुसंख्यक आबादी इन विचारों से सहमति नहीं रखती। अब केवल न्यायपालिका में ही मेरा भरोसा बचा है। यह फैसला कई अनसुनी आवाजों को प्रभावित करेगा।’
महमूदाबाद के वर्तमान राजा के पिता साल 1957 में पाकिस्तान चले गए थे लेकिन उनकी मां रानी कनीज आबिद और खुद वह पाकिस्तान ना जाकर भारत में ही रह गए। उन्होंने भारत की अपनी नागरिकता को भी नहीं छोड़ा। 1965 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने लगा, तब शत्रु संपत्ति (निगरानी और पंजीकरण) आदेश 1962 जारी किया गया। साल 1973 में वर्तमान राजा महमूदाबाद के पिता की लंदन में मौत हो गई। पिता की मौत के बाद भारत में स्थित उनकी पूरी संपत्ति का अधिकार वर्तमान राजा महमूदाबाद को मिल गया। उनका दावा है कि वह भारतीय नागरिक हैं और इसके कारण उनके पुश्तैनी जायदाद पर उनका कानूनी अधिकार है।
महमूदाबाद का राजपरिवार काज़ी नसरुल्लाह का वंशज माना जाता है। काज़ी नसरुल्लाह बगदाद के खलीफा के मुख्य काज़ी थे। वह सन् 1316 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान शाहिब-उद-दिन ओमर खिलजी के दरबार में बतौर राजदूत आए थे। बाद में वह मुहम्मद तुगलक की सेना में कमांडर की तरह लड़े। उन्हें अवध में इनाम के तौर पर एक बड़ी जागीर दी गई। इसी जागीर को महमूदाबाद रिसायत के नाम से जानते हैं।
-एजेंसी

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