EMTCT: माँ से बच्चे में संक्रमण को रोकने हेतु दोहरा उन्मूलन

EMTCT अर्थात्  एलिमिनेशन ऑफ मदर टू चाइल्ड ट्रांसमिशन: एचआईवी और सिफलिस के संचरण को बच्चों में पूर्ण रूप रोकने के लिए प्रतिबद्ध है

एटा| वर्ष 2015 में भारत में एचआईवी एस्टीमेशन नामक रिपोर्ट के माध्यम से जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि भारत में 15-49 वर्ष के बीच के वयस्कों में एचआईवी के प्रसार की अनुमानित दर 0.26% है। यह दर पुरुषों में 0.30% और महिलाओंमें 0.22% है जबकि उत्तरप्रदेश के सन्दर्भ में यह दर .12% के करीब है|

भारत में वर्ष 2007 में 22.26 लाख के मुकाबले वर्ष 2015 में एचआईवी (पीएलआईआईवी) के साथ रहने वाले लोगों की कुल संख्या 2015 में 21.17 लाख पाई गयी है।

अविभाजित आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 3.95 लाख लोग एच.आई.वी. के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं, महाराष्ट्र में 3.01 लाख, कर्नाटक में 1.99 लाख, गुजरात में 1.66 लाख, बिहार में 1.51 लाख और उत्तर प्रदेश में 1.50 लाख लोग एच.आई.वी. के साथ जीवन व्यतीत कर रहेहैं। कुल अनुमानित PLHIV के दो तिहाई (64.4%)लोग इन सात राज्यों से आते हैं| उत्तर प्रदेश में इसकी प्रसार के दर तो कम है परन्तु यह अत्यधिक संवेदनशील राज्य है।
आंकड़े बताते हैं कि बच्चे में माँ बाप से संचरण किसी व्यक्ति में एचआईवी संचरण का दूसरा सबसे बड़ा कारण है| इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए एचआईवी और सिफलिस को मां से बच्चे में संचारित होने से रोकने के लिए (ई.एम.टी.सी.टी) के रूप में दोहरी उन्मूलन की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है।

उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (UPSACS) में आई.सी.टी.सी./ पी.पी.टी.सी.टी. की प्रमुख बताती हैं कि “ भारत सरकार वर्ष 2020 तक आई एचआईवी और सिफलिस के संचरण को बच्चों में पूर्ण रूप रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य स्तर पर एक कार्यकारी समिति का गठन किया गया जिसके द्वारा इस लक्ष्य को एक चरणबद्ध तरीके से हासिल करने की योजना बनाई गई है। सरकार ने वर्ष 2017-18 में 45%अनुमानित गर्भवती महिलाओं को वर्ष 2018-19 में 75% गर्भवती महिलाओं को और 2019-20 में 95% को आच्छादित करने की योजना है।“

ए.एम.टी.सी.टी अर्थात माँ से बाचे में संक्रमण को रोकने के लिए 95% गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था मेंएचआईवी और सीफ़िलिस का परीक्षण करवाना होगा और एचआईवी और सीफ़िलिस से ग्रसित 95% गर्भवती महिलाओं को निदान हेतु इलाज प्राप्त करना होगा ।

उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (UPSACS) के अपर परियोजना निदेशक का कहना है कि “यदि हम माँ से बच्चे में होने वाले संकरण के इस लक्ष्य को रोकने में सक्षम हो जाते हैं तो हम तकरीबन 3000 बच्चों को संक्रमित होने से बचा पाएंगे’’

गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान एचआईवी पॉजिटिव मां से उसके बच्चे में संक्रमण की सबसे अधिक संभावना होती है यदि कोई प्रयास नहीं किया जाए तो इसके संचरण की दर 15% से लेकर 45% तक होती है परन्तु प्रभावी रूप से प्रयास किये जाने पर यही दर 5% से भी कम हो सकती है।

उत्तर प्रदेश में एचआईवी की स्थिति जानने के लिए और माता-पिता को एचआईवी नेगेटिव रखने के लिए प्रिवेंशन फ्रॉम पैरेंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन (पी.पी.टी.सी.टी) केंद्र प्राथमिक रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं| इन केंद्रों से जुड़े प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा काउंसिलिंग और परीक्षण, एचआईवी संक्रमण की प्रारंभिक पहचान की संभावना पैदा करता है और एआरवी प्रोफाईलैक्सिस, सुरक्षित प्रसव प्रथाओं, सुरक्षित शिशु आहार प्रक्रियाओं के साथ-साथ स्वैच्छिक परामर्श सहित अधिक व्यापक और रेफरल सेवाओं के लिए प्रवेश द्वार के रूप मंु कार्य करता है। अक्टूबर 2015 में यू.एन.पी में यूनिवर्सल एचआईवी स्क्रीनिंग लागू की गई है और एन.ए.सी.ओ द्वारा साझा 2015 की तकनीकी रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत की 35,255 गर्भवती महिलाओं को पी.पी.टी.सी.टी की आवश्यकता है जबकि राज्य के लिए आंकड़ा 3,959 है।

इस तरीके से एचआईवी परामर्श और परीक्षण सुविधाओं का स्तर बढ़ा है। वर्ष 2012-13 में 217 एसए-आईसीटीसी और 110 एफ-आईसीटीसी हैं, जो 2015-16 में 399 एसए-आईसीटीसी और 302 एफ आईसीटीसी तक बढ़ाए गए थे। वर्ष 2016-17 में एचआईवी स्क्रीनिंग / टेस्टिंग सुविधाओं से ब्लॉक को कवर करने के लिए एफ-आईसीटीसी केंद्रों को 676 तक बढ़ाया गया।

एक व्यापक रणनीति के रूप में डब्लूएचओ मानकों के अनुरूप, राष्ट्रीय पीपीटीसीटी कार्यक्रम महिलाओं और बच्चों के बीच एचआईवी संचरण को रोकने के लिए चार आयामों की पहचान की गई है:
 एचआईवी की प्राथमिक रोकथाम, विशेष रूप से ऐसी महिलाओं के लिए जो गर्भधारण की उम्र के बीच हों ।
 एचआईवी से पीड़ित महिलाओं में अनचाहे गर्भधारण की रोकथाम के लिए आईसीटीसी में और विशेषकर एआरटी केंद्रों पर परिवार नियोजन परामर्श प्रदान करना|
 एचआईवी से संक्रमित गर्भवती महिलाओं से उनके होने वाले बच्चे में संक्रमण की रोकथाम
 एचआईवीसंक्रमित महिला, उसके बच्चों एवं परिवार को उचित देखभाल,सहयोग एवम उपचार प्रदान करना |

पी.पी.टी.सी.टी द्वारा दी जा रही सेवाओं में निम्न बिंदु शामिल हैं:
 नियमित रूप से प्रसवपूर्व देखभाल में शामिल सभी गर्भवती महिलाओं के लिए ऑप्ट आउट विकल्प के साथ एच.आई.वी परामर्श और परीक्षण ।

 पति / पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करना और “एएनसी केंद्रित” से “परिवार केंद्रित” दृष्टिकोण को अपनाना
 सभी एच.आई.वी संक्रमित गर्भवती महिलाओं को एआरटी प्रदान करना।

 ए.एन. एम्. और आसाह के मदद से सभी एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करना|

 यौन संचरित रोग, टीबी और अन्य अवसरवादी संक्रमण की स्थिति में उचित देखभाल की व्यवस्था करना ।
 एएनएम, आशा और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के माध्यम से संक्रमित गर्भवती महिलाओं को पोषण परामर्श और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करना।
 प्रसव के एक घंटे के भीतर शीघ्र स्तनपान शुरू करने और 6 महीने तक केवल माँ का दूध पिलाने के लिए प्रेरित करना। 6 महीने के बाद, स्तनपान के साथ पूरक आहार लेने हेतु प्रेरित करना|
 टीकाकरण सहित नियमित स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में एच.आई.वी-संक्रमित शिशुओं का फॉलो-अप करना।
 एएनएम, आशा और जिला स्तर के नेटवर्क और अन्य आउटरीच कार्यकर्ता के माध्यम से एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार को सहयोग देने के लिए निरंतर फॉलो-अप करना।

  • Sarita Mullick
    Divisional Coordinator, Lucknow

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