चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्ष: हिमाचल और गुजरात चुनावों की तारीख एकसाथ क्‍यों नहीं कीं घोषित

नई दिल्‍ली। हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए एकसाथ तारीख की घोषणा न करने पर देश के मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्‍योति ने आयोग की ओर से पक्ष रखा है।
उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में चुनाव की तारीखों का फैसला कई परिस्थितियों को ध्यान में रखने के बाद किया गया है।
न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि हिमााचल प्रदेश के चुनाव आयोग ने केंद्रीय आयोग से राज्य में जल्द चुनाव संपन्न कराने की मांग की थी।
ज्‍योति ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के प्रशासन ने भी कहा था राज्य में कई क्षेत्र ऐसे है जहां दिसंबर के दौरान ठंड बढ़ जाती है और बर्फबारी भी होती है। ऐसे में चुनाव कराने में प्रशासन को खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ये हिल स्टेशन किन्नोर और चंबा जैसे इलाके हैं।
चुनाव आयोग का कहना है कि गुजरात चुनाव की तारीखों में देरी का कारण एक यह भी है कि हिमाचल में आने वाले नतीजों का प्रभाव वहां न पड़े। ज्‍योति ने कहा कि एक कारण यह भी है कि दोनों राज्य कई मायनों में अलग है और उन्हीं राज्यों के चुनाव साथ-साथ कराए जाते हैं, जो कहीं-न-कहीं एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं।
आयोग ने कहा कि इसका अक्सर ध्यान रखा जाता है कि एक राज्य का वोटिंग पैटर्न दूसरे राज्य के वोटिंग पैटर्न को प्रभावित न करे, इसलिए हिमाचल में काउंटिंग पीरियड 18 दिसंबर को रखा गया है। गुजरात चुनाव की तारीखों में देरी का चुनाव आयुक्त ने एक और कारण गुजरात में आई बाढ़ को भी बताया। उन्होंने कहा कि करीब 200 लोगों की जान लेने वाली बाढ़ से आए क्षति की पूर्ती में गुजरात का अधिकतर प्रशासन लगा हुआ है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए वहीं सरकारी अधिकारी काम में जुटेंगे जो इस समय बाढ़ इलाकों के सुधार में कार्यरत हैं। अगर उन्हें चुनाव की तैयारियों में बुलाया जाएगा तो इस बाढ़ इलाकों के सुधार में देरी आ सकती है इसलिए जब आचार संहिता लागू होगी तो सभी सरकारी अधिकारी चुनाव की तैयारियों में जुट जाएंगे।
-एजेंसी