ईडी ने भूमि घोटाला मामले में Robert Vadra को भेजा सम्मन

Robert Vadra के खिलाफ ईडी कर रहा है डीएलएफ, ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज व हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे की जांच

नई दिल्‍ली। आज शुक्रवार को भूमि सौदे के एक मामले में ईडी ने Robert Vadra को सम्‍मन भेजा है, प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में बहुत जल्द Robert Vadra से पूछताछ भी कर सकती है।
हरियाणा में चल रहे भूमि सौदा मामले की जांच ईडी कर रही है। बता दें कि डीएलएफ और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज मामले की जांच ईडी के हाथों में है। हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे की जांच ईडी के पास है। करीब पांच हजार करोड़ के मुनाफाखोरी का मामला सीबीआई के पास भी है।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

भूमि सौदे के हरियाणा और राजस्थान में चल रहे हैं मामले

गुरुग्राम के भूमि सौदा मामला 2008 का है। 2008 के भूमि सौदे के लिए खेरकी दौला पुलिस स्टेशन में वाड्रा, डीएलएफ और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह केस तीन लोगों के खिलाफ था जिसमें एक ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज भी थी। इस सौदे के कारण राजकोष के घाटे का आरोप लगाया गया था। वाड्रा और हुड्डा दोनों ने आरोपों का खंडन किया था।

रॉबर्ट ने फेसबुक पर लिखा पोस्ट- विधानसभा चुनाव हारने की कही है बात

शुक्रवार सुबर रॉबर्ट ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सोशल मीडिया पर लंबा चौड़ा एक पोस्ट लिखा है। रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक पर लिखा, मीडिया से जुड़े कुछ प्रश्न मेरे पास झूठे आरोपों के संबंध में आ रहे हैं। जिन्हें सरकार ने लीक किया है क्योंकि राजस्थान में चुनाव नजदीक हैं। दिलचस्प बात यह है कि उठाए जा रहे बहुत से मुद्दे न्यायालय में हैं। क्या यह केवल एक संयोग है कि सरकार की कुछ चुनिंदा एजेंसियों ने अपनी गतिविधियों को तेज करते हुए उन मुद्दों को उठाया है जिनका मुझसे कोई संबंध नहीं है या फिर जिनपर मैं सालों पहले जवाब दे चुका हूं और पिछले चार सालों से पूरी तरह सहयोग कर रहा हूं।

दुखद बात यह है कि भाजपा के अलावा हर कोई यह देख सकता है कि ये रणनीति कितनी हताश, साफ तौर से राजनीतिक और विरोधाभासी है। मुझे उम्मीद है कि स्वतंत्र और मीडिया में मौजूद पेशेवर व्यक्ति उन मुद्दों से अपना ध्यान नहीं हटाएंगे जिनका राजस्थान की जनता से सरोकार है। जैसे- भारी बेरोजगारी और कुशासन और खुद को सरकार के प्लान बी में नहीं उलझाएगी। जिसका इस्तेमाल बैकफुट पर जाने के बाद किया जाता है। फिर चाहे वह राफेल हो या फिर विधानसभा चुनाव हारने का डर।

-एजेंसी

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