ईडी ने ज़ब्त की Zakir Naik व मोहम्मद सलमान की करोड़ों की संपत्ति

नई दिल्‍ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विवादित इस्लामिक उपदेशक Zakir Naik व अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की , इसके साथ ही ईडी ने 193.06 करोड़ रुपये की आपराधिक संपत्ति की पहचान भी की है। ईडी ने Zakir Naik की कुल 50 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की है। बता दें कि ईडी ने जाकिर नाईक और अन्य के खिलाफ 22 दिसंबर 2016 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शिकायत दर्ज की थी।

इससे पहले इसी साल 22 मार्च को ईडी ने नाईक की मनी लॉन्ड्रिंग और फंड ट्रांसफर मामले में मदद करने के आरोप में नजमुद्दीन साथक को गिरफ्तार किया था। 19 जनवरी को ईडी ने नाईक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के सिलसिले में उसकी 16.40 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क कर दी थी।

मोहम्मद सलमान की 73.12 लाख रुपये की संपत्ति जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और अन्य के द्वारा टेरर फंडिंग के मामले में मोहम्मद सलमान और उनके परिवार से जुड़ी 73.12 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की। हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) का संस्थापक है।

इससे पहले पलवल मस्जिद पर की गई खुफिया एजेंसी (एनआईए) की जांच में पता चला था कि निजामुद्दीन के रहने वाले मोहम्मद सलमान ने हरियाणा के पलवल में खुलफ-ए-राशिदीन मस्जिद के निर्माण के लिए 70 लाख रुपये दिए थे। वह उस वक्त दुबई में था जब वह एलईटी के सदस्यों से मिला। उसे उसकी बेटियों की शादी के लिए भी पैसे मिले। एनआईए का कहना है कि इमाम सलमान को ये पैसा कथित तौर पर एलईटी से जुड़े गैर सरकारी संगठन फलाह-ए-इंसानियत से मिला है।

एनआईए के एक अधिकारी का कहना है, “हमारे पास इमाम सलमान के पैसे और पाकिस्तान स्थित एलईटी से जुड़े होने के पुख्ता सबूत हैं। हमारे पास ई मेल और चौट्स के रूप में इलेक्ट्रोनिक सबूत हैं जिनमें उसने एफआएफ से जुड़े पाकिस्तानी नागरिकों के साथ फंड को लेकर बातचीत की है। ऐसे ही दो तरह के संचार पाकिस्तान और दुबई से जुड़े हैं। हमें यह भी पता चला है कि वह तीन बार पाकिस्तान जा चुका है।”

बता दें एनआईए ने 3 अक्तूबर को पलवल के उतावड़ गांव स्थित मस्जिद में छापेमारी की थी। उससे पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इन लोगों को टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन तीन लोगों में से एक मस्जिद का इमाम मोहम्मद सलमान भी शामिल था। गांव के अधिकतर लोग इमाम सलमान पर लगे आरोप को गलत मानते हैं।

मस्जिद का निर्माण 1998 में शुरू हुआ था और इसका उद्घाटन 2010 में हुआ। इसके निर्माण के समय से जुड़े आस मुहम्मद नामी का कहना है, “इमाम सलमान के पिता एक बड़े धर्मगुरु थे जिनकी पहचान दुनियाभर में थी और उनमें से कुछ उन्हें मस्जिद की तामीर के लिए पैसे भेजते थे। मगर मस्जिद बनी है स्थानीय लोगों के चंदे से।”

-एजेंसी

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