एक उम्मीदवार एक सीट को चुनाव आयोग का समर्थन

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट में एक उम्मीदवार एक सीट को लेकर दायर की गई याचिका का चुनाव आयोग ने समर्थन किया है। इस याचिका में कहा गया है कि उम्मीदवारों को एक से अधिक सीट पर चुनाव लड़ने से रोका जाए। मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत एक उम्मीदवार को लोकसभा और विधान सभा चुनावों में अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की अनुमति है।
साल 2014 के आम चुनावों में भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने दो सीटों, वडोदरा और वाराणसी से चुनाव लड़ा था। बाद में उन्होंने वाराणसी को बरकरार रखा और वडोदरा की सीट को छोड़ दिया था। एक हलफनामा दाखिल करते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि एक उम्मीदवार को एक सीट पर चुनाव लड़ने के लिए प्रतिबंधित करने के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन किया जाना चाहिए।
आयोग के अनुसार उसने पूर्व में दो बार केंद्र सरकार के सामने इस बारे में अपने विचार व्यक्त किए थे और इस संबंध में उसने साल 2004 और साल 2016 में अपने प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे थे। चुनाव आयोग ने कहा कि दो सीटों से एक उम्मीदवार को चुनाव लड़ने देना सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ है, जिसे टाला जा सकता है।
आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि यह जीतने वाले उम्मीदवार के मतदाताओं के साथ भी अन्याय होता है, जो उस निर्वाचन क्षेत्र को छोड़ देते हैं और दूसरे निर्वाचन क्षेत्र को हासिल कर लेते हैं। हलफनामे में कहा गया है कि चुनाव आयोग सरकार को भेजे गए अपने प्रस्तावों पर अडिग है, जिन पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
चुनाव आयोग ने आगे कहा कि चुनावी सुधारों पर अपनी 255वीं रिपोर्ट में विधि आयोग ने भी इसका समर्थन किया था, जिसमें एक उम्मीदवार के लिए दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने को अनुचित पाया गया था। आयोग ने यह भी कहा है कि यदि शीर्ष अदालत यह सोचती है कि इस तरह के प्रतिबंध की जरूरत नहीं है तो आरपी अधिनियम में एक स्पष्ट प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उम्मीदवार उस निर्वाचन क्षेत्र के लिए फिर से होने वाले मतदान के खर्च का भुगतान करे, जिसे वह छोड़ रहा है।
साल 2004 में चुनाव आयोग ने प्रस्ताव दिया था कि विधानसभा सीट के लिए उम्मीदवार को 5 लाख रुपए और लोकसभा सीट के लिए 10 लाख रुपए देने चाहिए। आयोग की यह प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट के वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर आई है। बुधवार को यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया।
-एजेंसियां

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