Super specialty सुविधाओं वाले केडी हास्पीटल के एक ही कैम्पस में मौजूद हैं हर रोग के विशेषज्ञ

मथुरा। Super specialty केडी हास्पीटल में चिकित्सकों ने 12 वर्षीय यश वर्मा के लीवर से 140 मिली मवाद को निकाल कर उसे नई जिंदगी बख्शी है। मरीज मथुरा के कई नामीगिरामी चिकित्सालयों से निराश होकर केडी हास्पीटल में इलाज के लिए पहुंचा था। ऐसे जटिल रोग का निदान केडी हास्पीटल के एक ही कैम्पस में मौजूद हर रोग के विशेषज्ञों की उपलब्धता यानी कि मल्टी सुपर स्पेशियेलिटी सुविधाओं के चलते संभव हो सका है। अब यश न केवल स्वस्थ है अपितु वह पढाई लिखाई के साथ-साथ गर्मी की छुट्टियों में खेलकूद में भी मस्त नजर आ रहा है।

केडी हास्पीटल के बाल रोग विभाग के सह आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डा. जगदीश सोलंकी की ओपीडी में मथुरा शहर के लाल दरवाजा, चैक बाजार निवासी लल्लू वर्मा और नरेश कुमार वर्मा लीवर के मरीज अपने परिजनयश वर्मा को लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने जांचों के बाद बताया कि बच्चे के लीवर यानी कि यकृत में 140 मिली पश यानि कि मवाद भरा हुआ है। उन्होंने बच्चे के बेहतरीन इलाज के लिए कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक कमेटी बनाई। इसमें वरिष्ठ बाल शल्य चिकित्सक डा. एसबी शर्मा, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. जगदीश सोलंकी, डा. एडी तिवारी, डा. एस. आलम और रेडियोलाॅजिस्ट डा. राजेश अरोरा को शामिल किया गया। इसके बाद तय की गई लाइन आफ ट्रीटमेंट के अनुसार दो सप्ताह तक एंटीबाइटिक दवा देनेे के बाद मवाद 113 मिग्रा रह गया। इसके बाद अल्ट्रासाउंड गाइडेड एस्पिरेशन किया। इस दौरान 60 मिली मवाद लीवर से निकाला गया। दो हफ्ते और एंटीबाइटिक दवा देने के बाद अल्ट्रासाउंड किया तो 40 मिग्रा मवाद लीवर में दिखा। एंटीबाइटिक दवाएं खिलाने के बाद 26 मार्च को एक बार और अल्ट्रासाउंड किए जाने पर लीवर में मात्र 10 मिग्रा मवाद दिखाई दिया। चिकित्सक डा. जगदीश सोलंकी ने अब मरीज को खतरे से बाहर घोषित करते हुए गर्मी की छुट्टियां की मस्ती और पढाई दोनों पूरी करने की छूट यश को कुछ हिदायतों के साथ मनाने की दे दी है। यश अब सामान्य जीवन जी रहा है। लल्लू वर्मा ने बताया कि उनके मरीज का इलाज केडी हास्पीटल में कुछ हजार रुपयों में ही हो गया।

दो सप्ताह में डेढ लाख दिए तो भी ठीक से इलाज नहीं हुआ यश का

मथुरा शहर के लाल दरवाजा, चैक बाजार निवासी लल्लू वर्मा और नरेश कुमार वर्मा ने बताया कि वे यश वर्मा को लीवर का इलाज कराने के लिए हाईवे मसानी स्थित एक नामी गिरामी चिकित्सालय में ले गए। वहां चिकित्सकों ने यश को जल्द ही ठीक कर देेने का वादा किया। दो सप्ताह तक इलाज चलने के बाद यश को कोई फायदा नहीं हुआ। इस दौरान डेढ लाख रुपये से अधिक उसका इलाज में खर्च हो गया। उस नामी गिरामी हास्पीटल के इलाज से परेशान होकर वह केडी हास्पीटल में यश को लेकर पहुंचे।

मरीज उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएं लें एक ही कैम्पस में: डा. राम किशोर अग्रवाल

आरके एजूकेशन हब के चैयरमेन डा. राम किशोर अग्रवाल और वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि केडी हास्पीटल में उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं एक ही छत और कैम्पस में उपलब्ध हैं, वह भी न्यूनतम खर्चे पर। तब ऐसे में ब्रजवासियों और आस-पास के राज्यों के मरीजों को Multi super specialty सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए। इससे बेहतर स्वास्थ्य कम खर्चे पर प्राप्त कर सकें। जो कि आरके एजुकेशन हब ग्रुप का मुख्य उद्देश्य है।

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