डा. राजेंद्र प्रसाद एक उच्‍च कोटि के लेखक भी थे, जयंती आज

नई दिल्‍ली। देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद एक उच्‍च कोटि के लेखक भी थे उन्‍होंने 1946 में अपनी आत्मकथा के अलावा और भी कई पुस्तकें लिखी जिनमें बापू के कदमों में (1954), इंडिया डिवाइडेड (1946), सत्याग्रह ऐट चंपारण (1922), गांधी जी की देन, भारतीय संस्कृति व खादी का अर्थशास्त्र आदि कई रचनाएं शामिल हैं. राजेंद्र प्रसाद की कही बाते आज भी देश भर के लोगों को प्रेरणा देती हैं. आइये जानते हैं, राजेंद्र प्रसाद की कही उन बातों के बारें में जिनसे आप बेहतर इंसान बन सकते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर स्मरण करते हुए नमन किया है।

देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को हुआ। उनकी आज 134वीं जयंती है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा ‘देश के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद को उनकी जयंती पर कोटि कोटि नमन। अप्रतिम प्रतिभा के धनी एवं सादा जीवन उच्च विचार के प्रतीक राजेन्द्र बाबू देशवासियों के लिए सदा प्रेरणास्रोत रहेंगे।’

डॉ राजेंद्र प्रसाद 26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962 तक राष्ट्रपति पद पर रहे।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) भारत के पहले राष्ट्रपति थे. आज राजेंद्र प्रसाद की जंयती (Rajendra Prasad Jayanti) के मौके पर पूरा देश उनको याद कर रहा है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म (Rajendra Prasad Birthday) 3 दिसंबर 1884 में बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था. राजेंद्र प्रसाद (Rajendra Prasad) पढ़ाई लिखाई में अच्छे थे. उन्होंने कानून में मास्टर की डिग्री और डाक्टरेट की उपाधि हासिल कर रखी थी. राजेंद्र प्रसाद ने भारतीय संविधान के निर्माण में अपना खास योगदान दिया था. साल 1950 में राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने. वे 12 साल तक राष्ट्रपति पद पर बने रहे. साल 1962 में राष्ट्रपति पद से हट जाने के बाद राजेंद्र प्रसाद को भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया.

Rajendra Prasad Quotes

”मंजिल को पाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए याद रहे कि मंजिल की ओर बढ़ता रास्ता भी उतना ही नेक हो.”

”किसी की गलत मंशाएं आपको किनारे नहीं लगा सकतीं.”

”जो बात सिद्धांत में गलत है, वह बात व्यवहार में भी सही नहीं है.”

”हर किसी को अपनी उम्र के साथ सीखने के लिए खेलना चाहिए.”

”जो मैं करता हूं, उन सभी भूमिकाओं के बारे में सावधान रहता हूं.”

”खुद पर उम्र को कभी हावी नहीं होने देना चाहिए.”

”मैं एक ऐसे पड़ाव पर हूं, जहां खुद की उम्र को बेहद अच्छी तरह समझता हूं.”

”पेड़ों के आसपास चलने वाला अभिनेता कभी आगे नहीं बढ़ सकता.’-एजेंसी

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