डॉ. खुशबू मर्डर केस: किसी के गले नहीं उतर रही पुलिस द्वारा किए गए खुलासे की “कहानी”

मथुरा। राधापुरम एस्‍टेट में 13 जुलाई की शाम डॉ. खुशबू की हत्‍या करने वाले युवक को बेशक पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली किंतु हत्‍या के “कारण” की जो “कहानी” पुलिस द्वारा गढ़ी गई है, वो किसी के गले नहीं उतर पा रही।
पुलिस की मानें तो आरोपी रवीन्‍द्र पुत्र मोहन सिंह निवासी नगला टोंटा थाना मगोर्रा का अपनी पत्‍नी से पैसों को लेकर फोन पर विवाद हुआ था। अपने जीजा के यहां रह रही आरोपी की पत्‍नी ने उससे फोन पर कहा कि जब दो-ढाई लाख रुपए तेरे पास हों, तभी मुझे लेने आना।
आरोपी रवीन्‍द्र ने इसके बाद कई बोतल बीयर पी और फिर मंडी चौराहे से चाकू खरीद कर राधापुरम एस्‍टेट में लूट के उद्देश्‍य से घुस आया।
कॉलोनी में उसने सैक्‍टर 1 के मकान नंबर 19 का गेट खुला देखा और डॉ. खुशबू से रुपए मांगे। डॉ. खुशबू द्वारा विरोध करने तथा शोर मचाने पर उसने उनका बेरहमी से कत्‍ल कर दिया।
यहां सबसे पहला सवाल तो यह खड़ा होता है कि डॉ. खुशबू का परिवार मकान के जिस हिस्‍से में रहता है, वह ग्राउंड फ्लोर न होकर फर्स्‍ट फ्लोर है जबकि राधापुरम एस्‍टेट के अधिकांश मकान सिंगल स्‍टोरी हैं और ज्‍यादातर के गेट दिन में खुले ही रहते हैं। ऐसे में वह किसी ग्राउंड फ्लोर के मकान में न घुसकर पहली मंजिल पर क्‍यों गया।
दूसरे यदि डॉ. खुशबू ने उसे रुपए देने से इंकार कर दिया और शोर मचाने लगीं तो वह भागने के लिए हमला करता, न कि इतनी बेरहमी से उन्‍हें मार डालता।
वह हत्‍या के उद्देश्‍य से ही आया था, इसकी पुष्‍टि इस बात से भी होती है कि उसने न सिर्फ डॉ. खुशबू पर चाकू से कई प्रहार किए बल्‍कि उनके बचने की उम्‍मीद समाप्‍त होने के बाद इत्‍मीनान से वहीं शर्ट चेंज की और तब बाहर निकला जब डॉ. की बेटी घर के अंदर घुसने लगी।
राधापुरम एस्‍टेट के सीसीटीवी फुटेज बताते हैं कि कॉलोनी के अंदर घुसने के बाद उक्‍त युवक लगातार किसी के साथ मोबाइल पर बात कर रहा था और बात करते-करते ही एक बच्‍चे से कुछ पूछ भी रहा था। वह किससे और क्‍या बात कर रहा था तथा बच्‍चे से क्‍या जानकारी कर रहा था, इसकी जानकारी भी पुलिस ने नहीं दी है।
पुलिस की कहानी के अनुसार हत्‍या करने वाले युवक रवीन्‍द्र ने मंडी चौराहे पर एक ढकेल वाले से मात्र 20 रुपए में चाकू खरीदा और उसी चाकू से डॉ. खुशबू की हत्‍या की।
यहां एक अन्‍य सवाल यह खड़ा होता है कि मात्र 20 रुपए कीमत वाले ढकेल से खरीदे गए चाकू से क्‍या इतनी नृशंस हत्‍या की जा सकती है और क्‍या उसी चाकू के बल पर कोई एक गेट बंद कॉलोनी में दिन-दहाड़े लूट के उद्देश्‍य से घुसने की हिमाकत कर सकता है। वो भी तब जबकि वह कॉलोनी के बारे में बहुत कुछ न जानता हो।
बताया जाता है कि डॉ. खुशबू अच्‍छी-खासी हैल्‍दी थीं। ऐसे में क्‍या 20 रुपए वाले चाकू से उन्‍हें मार पाना संभव रहा होगा, वो भी तब जबकि उन्‍होंने हमलावर से मुकाबला भी किया।
हो सकता है कि चारों ओर से पड़ रहे दबाब के कारण पुलिस को डॉ. खुशबू की हत्‍या का जल्‍दबाजी में अनावरण करना पड़ा हो किंतु इससे वो तमाम सवाल अनुत्तरित रह गए जिनका पता लगना डॉ. खुशबू के परिजनों सहित राधापुरम एस्‍टेट वासियों के लिए भी जरूरी था।
पुलिस की कहानी से एक सीधा मैसेज यह जाता है कि हत्‍यारे से कहीं ज्‍यादा दोष तो डॉ. खुशबू का था जिन्‍होंने एक अति सुरक्षित मानी जाने वाली कॉलोनी में दिन के वक्‍त भी अपने घर का दरवाजा बंद करके नहीं रखा।
चूंकि लूट आदि की किसी भी संभावना से पहले ही इंकार किया जा चुका था इसलिए डॉ. खुशबू की हत्‍या का केस पुलिस के अनुसार लगभग क्‍लोज हो चुका है और अब कोई जानकारी सामने आने की गुंजाइश बचती नहीं है।
पुलिस ने इस मुतल्‍लिक जारी की गई प्रेस विज्ञप्‍ति में यह भी बताना आवश्‍यक नहीं समझा कि आखिर वह हत्‍यारे तक पहुंची कैसे। जिस मोबाइल के आधार पर उसकी उपस्‍थिति का पुलिस को पता लगा, क्‍या हत्‍यारा 13 जुलाई से लेकर अब तक उसी मोबाइल को बेखौफ इस्‍तेमाल करता रहा। सवाल बहुत हैं किंतु जवाब देने वाला कोई नहीं।
शायद इसीलिए सुबह के एक अखबार ने डॉ. खुशबू की हत्‍या का 24 जुलाई के दिन राजफाश होने की संभावना जताई थी तो दूसरे अखबार ने अंधेरे में तीर चलाने की बात लिखी थी। शायद दोनों की ही बात सच हो क्‍यों कि हत्‍यारा भले ही पकड़ा गया लेकिन हत्‍या के पीछे का मकसद तो गले नहीं ही उतर रहा।
-Legend News

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