CSR का हिस्‍सा माना जाएगा पीएम केयर्स फंड में दिया गया दान

नई दिल्‍ली। नोवेल कोराना वायरस महामारी के खिलाफ जंग के लिए बनाए गए पीएम केयर्स फंड को लेकर केंद्र सरकार के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के मुताबिक इस फंड में कंपनियों द्वारा दिए गए दान को इन कंपनियों के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी CSR का हिस्सा माना जाएगा।
28 मार्च को हुआ था फंड का गठन
पीएम केयर्स (प्राइम मिनिस्टर्स सिटिजंस असिस्टेंस ऐंड रिलीफ इन इमर्जेंसी सिचुएशंस) फंड का गठन 28 मार्च को कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने के लिए किया गया था। कॉरपोरेट मामलों के पीएम केयर्स फंड में कंपनियों द्वारा किए गए दान को उनके CSR का हिस्सा माने जाने को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए कंपनीज एक्ट, 2013 के शेड्यूल 7 में बदलाव किया।
पहले क्या होता था?
पहले कंपनियों द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दिए जाने वाले दान को ही कंपनियों के सीएसआर का हिस्सा माना जाता था। कॉरपरेट दानदाताओं को राहत देते हुए इस अधिसूचना में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने साफ किया है कि यह बदलाव 28 मार्च, 2020 की तारीख से लागू होंगे।
CSR क्या है?
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी CSR का मतलब कंपनियों को यह बताना है कि उन्होंने अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन किन गतिविधियों में किया। इन गतिविधियों के बारे में सरकार फैसला लेती है। भारत में CSR के नियम एक अप्रैल 2014 से लागू हैं। यह नियम उन कंपनियों पर लागू होते हैं जिन कम्पनियों की सालाना नेटवर्थ 500 करोड़ रुपये या सालाना आय 1000 करोड़ की हो या फिर सालाना लाभ पांच करोड़ का हो। ऐेसी कंपनियों को CSR गतिविधियों पर खर्चा करना जरूरी होता है।
-एजेंसियां

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