डॉनल्ड ट्रंप ने एग्जिक्युटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए

Donald Trump signs executive order
डॉनल्ड ट्रंप ने एग्जिक्युटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एग्जिक्युटिव ऑर्डर पर दस्तखत कर दिया। इसमें अमेरिकी कंपनियों के व्यावसायिक चलन और रोजगार देने के रिवाज की समीक्षा किए जाने का जिक्र है।
दरअसल, ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान के दौरान ही देशवासियों से वादा किया था कि राष्ट्रपति बनने पर वह अमेरिकयों का रोजगार विदेशियों के हाथों छिनने नहीं देंगे। एग्जिक्युटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर इसी कड़ी में उठाया गया एक कदम है।
तो चलिए, विभिन्न पहलुओं से जानते हैं कि क्या हैं इस ऑर्डर के मायने…
पहली बात, एग्जिक्युटिव ब्रांच की नीति अमेरिका में निर्मित सामानों, उत्पादों और वस्तुओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की है। इसके लिए संघीय वित्तीय सहायता पुरस्कार और संघीय खरीद के नियमों और शर्तों के मुताबिक कानून का कठोरता से पालन करना होगा।
मतलब, अमेरिकी कंपनियों के लिए सस्ते आयातित उत्पादों, खासकर स्टील का इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा। यह ट्रंप के उस नजरिए के अनुकूल है कि अमेरिका आयात बहुत करता है और निर्यात बहुत कम। इसके लिए सबसे ज्यादा चीन को कोषा जाता है। उसे अमेरिका में सस्ते सामान भेजकर अमेरिकी फैक्ट्रियों से नौकरियों में बड़ी कटौती करने का दोषी ठहराया जाता है। कंपनियों को टैक्स में छूट दी जाएंगी, लेकिन नियम का पालन नहीं करने पर उन्हें ट्रंप प्रशासन का कोपभाजन भी बनना होगा।
दूसरी बात, सभी एजेंसी अमेरिकी खरीद के कानून पर गहरी नजर रखेंगी और इसे लागू करवाएंगी। कंपनियों की ओर से विभिन्न छूटों के इस्तेमाल में कटौती सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी एजेंसियों की होगी। वो इन छूटों के इस्तेमाल का इस नजरिए से भी आकलन करेंगे कि ये घरेलू नौकरियों और विनिर्माण पर क्या असर डाल रही हैं।
मतलब कि एजेसियां नौकरियां देने की प्रक्रिया, व्यापार योजनाओं और खरीद पर नजर रखेंगी। इससे कंपनियों, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नॉलजी फर्मों के लिए सरकारी छूट पाना, सस्ते विदेशी कामगारों की नियुक्ती और नौकरियों की तलाश कर रहे अमेरिकियों को नजरअंदाज करना कठिन हो जाएगा।
तीसरी बात, जरूरत पड़ने पर इमिग्रेशन सिस्टम के कामकाज से जुड़े पहले के कानूनों और निर्देशों में संशोधन किया जाएगा या इनकी जगह नए कानून और निर्देश जारी किए जाएंगे ताकि अमेरिकी कामगारों के हितों की रक्षा की जा सके। इसके लिए धोखाधड़ी और दुर्व्यवहार के नियमों को भी कठोर किया जाएगा।
मतलब कि ट्रंप प्रशासन ने पहले ही उस प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है जिसमें एम्प्लॉयर्स ज्यादा फी के दम पर अपने विदेशी कर्मचारियों के आवेदन जल्द पास करवा लेते थे। अब सरकार द्वारा वेतन निर्धारण एवं नियुक्तियों की प्रक्रिया से संबंधित मौजूदा नियमों में हायर अमेरिकन प्लान के अनुकूल बदलाव किए जाएंगे। हालांकि यह साफ नहीं है कि ये बदलाव नियम बन पाएंगे (या इन्हें कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा)।
कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी नौकरियों पर किसका हक होगा।
चौथी बात, महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल), श्रम मंत्री (सेक्रटरी ऑफ लेबर) और आंतरिक सुरक्षा मंत्री (सेक्रटरी ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी) उन सुधारों का सुझाव देंगे जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिले कि एच-1बी वीजा उच्च कौशलयुक्त या बड़ी सैलरी वाले आवदेकों को ही मिले।
मतलब, यह ऑर्डर अमेरिका और भारतीय कंपनियों के अतिथि कर्मचारियों के वह काम करने पर भी रोक लगाता है, जिसे अमेरिकी कर्मचारी करना नहीं चाहते या कर नहीं सकते। यदि आप बेहद योग्य हैं तो आपको मौका मिल सकता है। हालांकि एच-1बी वीजा प्राप्त करना मुश्किल है। यूएससीआईएस ने 31 मार्च को एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि कम्प्यूटर प्रोग्रामर्स एच-1बी वीजा के तहत योग्य हैं। उन्हें सिर्फ यह साबित करना होगा कि इस पेशे में उनके पास खास योग्यता है। सिर्फ कम्प्यूटर डिग्री होना काफी नहीं होगा।
-एजेंसी

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