डोनल्ड Trump ने ईरान की मेटल इंडस्ट्री पर प्रतिबंध लगाया

अमरीका और ईरान के बीच रिश्ते दिन पर दिन तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. ईरान के ये कहने पर कि वह परमाणु समझौते से जुड़ी कुछ प्रतिबद्धताओं से बाहर निकल रहा है, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड Trump ने ईरान पर और दबाव बना दिया है.
Trump ने एक आदेश जारी करते हुए ईरान की मेटल इंडस्ट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है.
ईरान की मेटल इंडस्ट्री का देश के निर्यात में बड़ा हिस्सा है और तेल-गैस के बाद इसका एक्सपोर्ट सबसे अधिक है.
हालाँकि Trump ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वो ईरान के नेताओं के साथ मिलकर किसी डील पर पहुँच जाएंगे.
ईरान के साथ परमाणु समझौते में शामिल पश्चिमी देशों ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह परमाणु समझौते के नियमों को तोड़ेगा तो उसे इसके बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
इन देशों ने कहा है कि वह ईरान के साथ परमाणु समझौते का समर्थन करते रहेंगे बशर्ते ईरान इस समझौते से पीछे न हटे और इसकी सभी शर्तों को पूरा करता रहे.
2015 में हुए समझौते के मुताबिक ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम रोक देना था, बदले में उस पर लगे प्रतिबंध हटा लिए गए थे.
Trump ने क्या कहा?
Trump ने कहा, “आज की कार्यवाही ईरान के राजस्व पर असर डालेगी. ईरान की मेटल इंडस्ट्री का कुल एक्सपोर्ट में 10 फ़ीसदी हिस्सा है. साथ ही उन्होंने दूसरे देशों को भी चेतावनी दी कि अगर वे ईरान के स्टील और अन्य धातुओं को उनके बंदरगाहों में उतारने की अनुमति देते हैं तो इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”
उन्होंने कहा, “अगर ईरान के रुख़ में कोई बदलाव नहीं हुआ तो उस पर और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.”
अमरीका ने ईरान के जिन मेटल्स पर प्रतिबंध लगाए हैं, उनमें लोहा, इस्पात, एल्यूमीनियम और तांबा शामिल है.
अमरीका ने पहले भी ईरान के तेल निर्यात पर रणनीति तय की हुई है जिसका उद्देश्य दुनियाभर में ईरान के तेल की बिक्री को रोकना है लेकिन Trump ने कहा कि वो बात करने के लिए तैयार हैं.
उन्होंने कहा, “मैं किसी समझौते पर ईरान के नेताओं के साथ एक मीटिंग का इंतजार कर रहा हूं और सबसे जरूरी बात कि भविष्य में वे जिसके हक़दार है उसके लिए कुछ कदम उठाना चाहता हूं.”
अमरीका ने हाल ही में कहा है कि ईरान अमरीकी सेना और उनके सहयोगियों को खतरा है. जिसकी कुछ जानकारी दी हुई है. एक अमरीकी युद्धपोत खोड़ी में तैनात किया हुआ है. और इसी बीच अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इराक़ का औचक दौरा किया है.
ईरान ने अब इस समझौते से खुद को आंशिक तौर पर अलग कर दिया है यानी समझौते की कुछ शर्तों को वो नहीं मानेगा.
ईरान पर नए प्रतिबंध लगाकर ट्रंप प्रशासन ने उसकी अर्थव्यवस्था को ख़ासा नुकसान पहुंचाया है. ईरान की मुद्रा अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई और महंगाई की दर करीब चौगुनी हो गई है.
ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने कहा कि उनकी तरफ से उठाए गए ताज़ा कदम समझौते के तहत ही हैं.
ईरान ने यूरोपीय देशों को 60 दिन का वक़्त दिया है और कहा है कि वो अमरीका की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों से ईरान को बचाने के लिए कदम उठाएं.
इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसा न करने की सूरत में वह यूरेनियम का उत्पादन एक बार फिर शुरू कर देगा.
वहीं दूसरी तरफ लंदन में मौजूद अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि अमरीका ईरान के प्रभाव को रोकने के लिए अपने पश्चिमी साथियों के साथ खड़ा है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि परमाणु समझौते पर अमरीका के कुछ अलग विचार हैं.
कौन से देश समझौते में शामिल?
चीन और रूस के अलावा ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी अभी भी ईरान के साथ परमाणु समझौते में शामिल हैं. अमरीका पिछले साल खुद को इस समझौते से अलग कर चुका है.
ब्रिटेन के विदेश सचिव जेरेमी हंट ने ईरान के ताज़ा कदम को “अस्वीकार” करते हुए ईरान से अपील की है कि वह आगे और ऐसे कदम ना उठाए. साथ ही उन्होंने ईरान को “समझौते के नियमों का पालन करने की सलाह” भी दी.
जेरेमी ने कहा कि ईरान को इस समझौते को तोड़ने से पहले इसके भविष्य के बारे में सोचना चाहिए.
जर्मनी के विदेश मंत्री हीको मास ने इस समझौते को यूरोप की सुरक्षा के लिए अहम बताया और कहा कि वे अभी भी समझौते के साथ हैं.
फ़्रांस के रक्षा मंत्री फ़्लोरेंस पार्ले ने मीडिया से कहा कि यूरोपीय ताकतें इस समझौते को बचाने की हरसंभव कोशिश कर रही हैं लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो ईरान को इसके बुरे परिणाम और अधिक प्रतिबंध भुगतने पड़ सकते हैं.
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने समझौते में शामिल सभी पक्षों से उनकी प्रतिबद्धताओं पर टिके रहने की अपील की, साथ ही कहा कि पश्चिमी देश “मुद्दे से ध्यान भटकाना चाहते” हैं.
चीन ने कहा कि वह ईरान पर लगाए गए अमरीका के प्रतिबंधों का कड़ा विरोध करता है.
इन सबके बीच अमरीकी विदेश मंत्री पोम्पियो ने इस मसले पर ज़्यादातर चुप्पी साधनी ही बेहतर समझी और बस इतना कहा कि वे ईरान के अगले कदम का इंतज़ार करेंगे.
हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के विशेष सहायक टिम मौरिसन ने कहा कि ईरान का यह कदम यूरोप को ब्लैकमेल करने के लिए है. उन्होंने यूरोपीय देशों से ‘इंसटेक्स’ (इंस्ट्रूमेंट इन सपोर्ट ऑफ़ ट्रेड एक्सचेंज) से पीछे ना हटने की अपील की है.
इंसटेक्स क्या है?
यह पेमेंट करने का एक नया तरीका है, जिसे ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने इस साल जनवरी में तैयार किया ताकि वो ईरान पर लगे प्रतिबंधों में किसी तरह की छेड़छाड़ किए बिना उसके साथ व्यापार जारी रख सकें.
इस तरह के व्यापार में प्रमुख तौर पर ईरानी लोगों की ज़रूरतों का सामान शामिल है जैसे खाद्य पदार्थ, दवाइयां और अन्य सामान जिन पर प्रतिबंध नहीं लगा है.
ईरान के लिए विदेशी लेनदेन का सबसे प्रमुख उत्पाद तेल है, लेकिन इंसटेक्स में तेल शामिल नहीं होता.
ईरान चाहता है कि यूरोपीय देश इसे भी इसमें शामिल करें. लेकिन ऐसा करने से व्यापारी अमरीका के प्रतिबंधों की ज़द में आ सकते हैं.
ईरान ने क्या कदम उठाया?
ईरान ने परमाणु समझौते के दो हिस्सों से खुद को अलग किया है, जिन्हें ज्वाइंट कम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन (जेसीपीओए) कहा जाता है. इसके तहत सरप्लस यूरेनियम और हेवी वॉटर की बिक्री शामिल होती है.
इस समझौते के तहत परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले सरप्लस यूरेनियम को ईरान अपने पास नहीं रख सकता और उसे विदेश में बेचता है.
ईरान का कहना है कि अगर समझौते में शामिल देश अमरीका के लगाए प्रतिबंधों का साथ नहीं देते हैं और ईरान की आर्थिक हालत पर विचार करते हैं तो वह 60 दिन के बाद दोबारा यूरेनियम की बिक्री शुरू कर देगा.
ईरान ने ये भी चेतावनी दी है कि वो तय सीमा से अधिक मात्रा में अधिक एनरिच्ड यूरोनियम बनाना शुरु कर देगा और साथ ही अरक हेवी वॉटर रीएक्टर पर काम करना शुरु करेगा.
-BBC

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