डोनल्ड ट्रंप ने अवैध प्रवासियों के लिए बनाया गया विवादित कानून पलटा

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने आख़िरकार अवैध प्रवासियों को उनके बच्चों से अलग न किए जाने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. उन्होंने वादा किया है कि अब प्रवासी परिवार एकसाथ रहेंगे.
इस आदेश में कहा गया है कि अब अवैध प्रवासी परिवारों को एकसाथ हिरासत में लिया जाएगा. हालांकि, अगर माता-पिता के हिरासत में लिए जाने से बच्चों पर ग़लत प्रभाव पड़ने की आशंका हो तो उन्हें अलग ही रखा जाएगा.
आदेश में यह नहीं बताया गया है कि बच्चों को उनके माता-पिता से कितने समय के लिए अलग रखा जाएगा. साथ ही ट्रंप का यह आदेश कब से लागू होगा यह अभी साफ़ नहीं है.
आदेश में आप्रवासन के उन मामलों को प्राथमिकता से निबटाने को कहा गया जिनमें एक ही परिवार के कई सदस्यों को हिरासत में लिया गया हो.
‘बच्चों की तस्वीरें देखकर पिघल गया’
ट्रंप ने कहा कि वो अपने मां-बाप से अलग हुए बच्चों की तस्वीरें देखकर पिघल गए और इसीलिए उन्होंने ये आदेश जारी किया.
उन्होंने कहा कि उन्हें ख़ुद परिवारों को अलग होते देखना पसंद नहीं है.
अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप और बेटी इवांका ट्रंप भी परिवारों को साथ रखे जाने का समर्थन करती हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मेलानिया और इवांका, ट्रंप पर प्रवासियों के लिए बने विवादित क़ानून में नरमी बरतने का दबाव डाल रही थीं.
डोनल्ड ट्रंप के इस आदेश पर हस्ताक्षर करने के कुछ देर बाद पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक फ़ेसबुक पोस्ट में कहा कि शरणार्थियों और प्रवासियों का स्वागत करने की तरकीब ढूंढना ही अमरीका की परंपरा है.
पहले क्या था ट्रंप का रुख़?
इससे पहले डोनल्ड ट्रंप ने विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी के सदस्यों पर उनके काम में बाधा डालने का आरोप लगाया था.
उन्होंने प्रवासियों के लिए बनाई गई अपनी ‘ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ का बचाव भी किया था.
ट्रंप ने ये भी कहा था कि यूरोपीय देशों ने लाखों प्रवासियों को अपने यहां जगह देकर बड़ी ग़लती की है.
क्या है विवादित क़ानून?
विवादित क़ानून के मुताबिक़ अमरीका की सीमा में अवैध तरीके से घुसने वालों पर आपराधिक मामला दर्ज कर उन्हें जेल में डाल दिया जाता है. ऐसे प्रवासियों को उनके बच्चों से भी मिलने नहीं दिया जाता और उन्हें अलग रखा जाता है.
इन बच्चों की देखभाल अमरीका का ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ ऐंड ह्यूमन सर्विसेज’ करता है. इससे पहले बिना ज़रूरी काग़ज़ात के पहली बार सीमा पार आने वाले प्रवासियों को अदालत में बुलाया जाता था.
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि समन भेजे जाने के बावजूद ये प्रवासी कभी अदालत में पेश नहीं होते थे इसलिए इन पर सीधे आपराधिक मामला दर्ज किए जाने का नियम लागू करना पड़ा.
नए क़ानून के अनुसार भी अवैध रूप से सीमा लांघने वालों को हिरासत में लिया जाएगा और जेल भेजा जाएगा लेकिन एकसाथ. ट्रंप के नए आदेश में ये भी साफ़ है कि अवैध प्रवासियों को लेकर अमरीका की ‘ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ पहले की तरह ही लागू रहेगी.
बच्चों की तस्वीरों से बढ़ा था विवाद
ट्रंप प्रशासन के प्रवासी क़ानून पर विवाद उस वक़्त और बढ़ गया जब ज़ंजीर लगे दरवाज़ों के पीछे प्रवासियों के बच्चों की कुछ तस्वीरें मीडिया में आईं.
इन तस्वीरों को देखकर बच्चों के लिए बने इन केंद्रों की तुलना नाज़ी यातना शिविरों से की जाने लगी.
अमरीकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ 5 मई से 9 जून के बीच 2,342 प्रवासी बच्चे उनके माता-पिता से अलग हो चुके हैं.
मेक्सिको के विदेश मंत्री लुइस विदेगारा कासो ने बच्चों को उनके परिवार से अलग किया जाना ‘क्रूर और अमानवीय’ बताया था.
-BBC

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »