युवा महिला पत्रकारों को Sabarimala न भेजें, मीडिया घरानों से हिंदू संगठनों की अपील

Sabarimala में कल से शुरू होगी मासिक पूजा

नई दिल्ली। केरल के Sabarimala में भारी विरोध के बीच सोमवार को एक बार फिर मासिक पूजा के लिए मंदिर के कपाट खुलेंगे। इस बीच कई हिंदू संगठनों ने न्यूज कवर करने के लिए युवा महिला पत्रकारों को Sabarimala नहीं भेजने की मीडिया घरानों से अपील की है।
ये अपील सबरीमाला कर्म समिति द्वारा जारी की गई है।

ये समिति दक्षिणपंथी संगठनों का एक संयुक्त मंच है, जिसमें विश्व हिंदू परिषद और हिंदू एक्यावेदी भी शामिल हैं। बता दें कि यह समिति Sabarimala मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दे दी थी।

गौरतलब है कि पिछले महीने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यहां हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला था। जब मंदिर पांच दिनों के लिए मासिक पूजा के लिए खुला था तो इस अवसर की रिपोर्टिंग करने के लिए आई महिला पत्रकारों से बदसलूकी की गई थी। उनके वाहनों को निशाना बनाया गया था और प्रदर्शनकारियों के कारण उन्हें वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा था।

संपादकों को लिखे पत्र में समिति ने कहा कि 10 से 50 साल के आयु वर्ग की महिलाओं के अपने काम के सिलसिले में मंदिर में प्रवेश करने से स्थिति और बिगड़ सकती है। इसमें कहा गया है, ‘इस मुद्दे पर श्रद्धालुओं के रुख का समर्थन या विरोध करने के आपके अधिकार को पहचानते हुए हम उम्मीद करते हैं कि आप ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे स्थिति और बिगड़े।’

इस दौरान समिति ने आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर पुनर्विचार और रिट याचिकाओं पर 13 नवंबर को सुनवाई करने का फैसला किया है, लेकिन राज्य सरकार फैसले के खिलाफ ‘जन आंदोलन’ को जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है और पुलिस बल का इस्तेमाल कर ‘जल्दबाजी’ में इसे लागू करने की कोशिश कर रही है।

समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

-एजेंसी

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