अधिकारियों द्वारा जन प्रतिनिधियों को प्रोटोकाल न देने पर होगी सख्‍त कार्यवाही

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिकारियों द्वारा जन प्रतिनिधियों को सामान्य शिष्टाचार व प्रोटोकाल न देने को गंभीरता से लिया है। सभी विभागों के प्रमुख सचिवों से कहा गया है कि इस तरह का आचरण कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन है इसलिए ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही की जाए।
प्रमुख सचिव संसदीय कार्य सुरेश कुमार गुप्ता ने इस संबंध में हाल में नए सिरे निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि बार-बार निर्देश जारी होने के बाद भी शासन को जानकारी मिली है कि विधानमंडल के सदस्यों के प्रति यथोचित शिष्टाचार व प्रोटोकाल का पालन न किए जाने की शिकायतें प्राप्त होती रहीं हैं। असल में इस साल विधानसभा के दूसरे सत्र में बसपा के सुखदेव राजभर ने सदन में विधायकों को अधिकारियों द्वारा समुचित प्रोटोकाल न दिये जाने का मामला सदन में उठाया था। इस पर विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने सरकार को निर्देशित किया था। इस पर सरकार ने संज्ञान लिया है।
आदेश में कहा गया है कि सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, डीजीपी, कमिश्नर व डीएम, एसपी अपने अधीन अधिकारियों व कर्मचारियों को शिष्टाचार व प्रोटोकाल देने के लिए पहले से जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करवाएं।
आदेश में कहा गया है कि जो जनप्रतिनिधि सब्सिडियरी वारंट आफ प्रिसीडेंस में एक तय स्थान रखते हैं, उनके साथ शिष्टाचार व प्रोटोकाल व सौजन्य प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाए। इन निर्देशों का उल्लंघन उप्र राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के नियम 3(2) के दायरे में आता है।
-एजेंसी

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