Divyang बच्चे भी कर सकते हैं चमत्कारः डॉ. बृजनंदन पटसारिया

मथुरा। अभिभावक सामान्य बच्चों की ही तरह अपने Divyang बच्चों पर भी ध्यान दें। Divyang बच्चों में कुछ अलग गुण होते हैं तथा उनमें भी चमत्कार करने की क्षमता होती है। यह बातें मंगलवार को संस्कृति यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ रिहैबिलिटेशन की तरफ से आयोजित सामुदायिक आधारित पुनर्वास और जागरूकता अभियान कार्यक्रम में डॉ. बृजनंदन पटसारिया ने अभिभावकों को बताईं।

डॉ. पटसारिया ने कहा कि मेडिकल कारणों से कभी-कभी बच्चों के विशेष अंगों में दोष उत्पन्न हो जाता है, जिसकी वजह से हमारा समाज उन्हें ‘विकलांग’ की संज्ञा दे देता है, जोकि उचित नहीं है। डॉ. पटसारिया ने कहा कि हमारे देश में दिव्यांगों के प्रति दो तरह की धारणाएं देखने को मिलती हैं। पहला, यह कि जरूर इसने पिछले जन्म में कोई पाप किया होगा और दूसरा, उनका जन्म ही कठिनाइयां सहने के लिए हुआ है, इसलिए उन पर दया दिखानी चाहिए। लोगों की सोच और तिरस्कार की वजह से ही दिव्यांग स्व-केन्द्रित जीवनशैली व्यतीत करने को विवश हो जाते हैं।

डॉ. अंजली बिहानी ने महिलाओं का आह्वान किया कि वह अपने निःशक्त बच्चों को लेकर गलत धारणा न पालें। यदि आपके घर या उसके आसपास कोई निःशक्त बच्चा दिखे तो उसे सामान्य बच्चों की तरह ही प्यार और स्नेह दें तथा डॉक्टर के पास जाकर उसका उपचार कराएं। डॉ. पवन गुप्ता ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को भी शिक्षित कर यदि उन्हें सृजनात्मक कार्यों की ओर मोड़ा जाए तो वे भी राष्ट्र के विकास में अमूल्य योगदान दे सकते हैं। दिव्यांग बच्चे के स्वावलम्बी होने से वह अपने आश्रितों पर बोझ नहीं बनेगा। डॉ. गुप्ता ने कहा कि शारीरिक व्याधियों से जूझ रहे लोगों को ‘डिसेबल्ड’ न कहकर ‘डिफरेंटली एबल्ड’ कहना ज्यादा अच्छा होगा। लैब टेक्नीशियन योगेश्वर बिहारी ने भी दिव्यांग बच्चों को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।

संस्कृति यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ रिहैबिलिटेशन की जहां तक बात है उसके डी.एड. और एस.ई.एम.आर. द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राएं दिव्यांग बच्चों को लेकर निरंतर मथुरा जनपद के गांवों का सर्वे कर रहे हैं। इस सर्वे में अब तक 33 बच्चे चिह्नित किए जा चुके हैं। संतोष मौर्य, चंचल कोशिश, देवेन्द्र कुमार, दुर्गेश वर्मा, प्रवीण कुमार, आशीष उपाध्याय, अपूर्वा देसाई, जाकिर हुसैन, राहुल कुमार आदि शिक्षकगण बृजमण्डल के दिव्यांग बच्चों को तालीम देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहे हैं। अजीजपुर की हेमलता, तरौली की राजमती, अकबरपुर की राजकुमारी, छाता की मीनू, रीना तथा कोसीकलां के सुभाषचंद्र ने संस्कृति यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ रिहैबिलिटेशन के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की।

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