बाबरी विध्वंस केस के फैसले से असंतुष्‍ट कांग्रेस ने Judiciary को Modiciary बताया

नई दिल्‍ली। 28 साल पुराने बाबरी विध्वंस केस में सभी 32 आरोपियों को कोर्ट से बाइज्जत बरी किए जाने पर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि देश Judiciary (स्वतंत्र न्यायपालिका) से मोदीशरी (मोदी से प्रभावित न्यायपालिका) की तरफ बढ़ रहा है। कई बार विवादित टिप्णियां दे चुके पश्चिम बंगाल के बेहरामपुर लोकसभा से कांग्रेस सांसद ने इशारों-इशारों में कहा कि जज ने सरकार से पुरस्कृत होने के लिए न्याय को ताक पर रखकर फैसला दिया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से सच्चे लोगों के मन में डर की भावना घर कर जाएगी और गलत प्रवृत्ति आनंद मनाएंगे।
अधीर रंजन चौधरी ने किया ट्वीट
चौधरी ने ट्वीट किया, ‘जब न्याय नहीं किया जाता है तो सत्य के साथ खड़े लोगों के मन में आतंक बैठ जाता है जबकि गलत करने वाले खुशी से झूमते हैं। जब फैसला सरकार को खुश करने के लिए दिया जाता है तो फैसला देने वाला अपार संपत्ति और तोहफों से नवाजा जाता है। आशंका है कि ऐसा बार-बार हो। भारत Judiciary की जगह Modiciary की तरफ बढ़ रहा है।’
ओवैसी ने कहा, अदालत के इतिहास का काला दिन
उधर, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस फैसले को अन्याय बताते हुए कहा कि वो बतौर भारतीय मुसलमान आज के दिन को अदालती इतिहास का काला दिन मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं बतौर भारतीय मुस्लिम आज अपमान, शर्म और असहाय महसूस कर रहा हूं। बिल्कुल वैसा ही जैसा 1992 में युवावस्था में किया था।’
सभी 49 आरोपी अदालत से बरी
ध्यान रहे कि लखनऊ स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद ढांचे को गिराने के मामले में सभी 49 आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें से 17 आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी थी। स्पेशल सीबीआई जज एसके यादव ने अपने फैसले में कहा कि उस दिन की घटना पूर्वनियोजित नहीं थी और भीड़ ने अनियंत्रित होकर बाबरी का ढांचा गिरा दिया। बहरहाल, फैसले के बाद सभी मौजूद 32 आरोपियों के साथ-साथ रामजन्मभूमि आंदोलन के प्रति आस्था रखने वालों में खुशी का माहौल है, वहीं विरोधी इसे न्याय का मजाक बता रहे हैं।
-एजेंसियां

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