ममता बनर्जी पर दिलीप घोष ने लगाया पूर्व नक्सलियों को शरण देने का आरोप

सिलीगुड़ी। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने अभिनंदन यात्रा के दौरान एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। दिलीप घोष ने ममता पर आरोप लगाते हुए कहा कि तृणमूल पार्टी का जनाधार खिसक रहा है। इसलिए भाजपा से मुकाबला करने और जनता को डराने के लिए वह पूर्व नक्सलियों को पार्टी में शामिल कर रही हैं।

घोष ने जलपाईगुड़ी जिले में बुधवार को अभिनंदन यात्रा के दौरान रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि ममता बनर्जी राज्य में भाजपा के बढ़ते जनाधार से डरने लगी हैं। घोष ने कहा कि भाजपा की बढ़ती मौजूदगी का मुकाबला करने के लिए तृणमूल पूर्व नक्सली नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी में शामिल कर रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल में बुआ-भतीजे वाली पार्टी की कोई जगह नहीं है। बांकुरा में जाकर मारपीट कर चुनाव में जीताने वाले माओवादी नेताओं को खोजा जा रहा है। जेल से रिहा कर नेता बनाने की कोशिश की जा रही है। तृणमूल कांग्रेस लोगों को डरा धमकाकर चुनाव जीतना चाहती है। उन्होंने सीएम पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दीदी को अपने भाई पर भरोसा नहीं रहा, इसलिये दिल्ली से लोगों को लाकर चुनावी रणनीति बनाई जा रही है, लेकिन यहां मैं एक बात स्पष्ट कर दूं, न तो नक्सली और न ही तृणमूल भाजपा को राज्य में आने से रोक पाएगी।

छत्रधर महतो के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की संभावना
माओवादी समर्थित पीपुल्स कमेटी अगेंस्ट पुलिस एट्रोसिटीज के पूर्व नेता छत्रधर महतो के जल्द ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने पिछले सप्ताह एक कार्यक्रम के लिए लालगढ़ के अपने दौरे के दौरान महतो से बंद कमरे में एक घंटे तक बैठक की। महतो माओवादियों के समर्थन वाले लालगढ़ आंदोलन के सबसे प्रमुख नेता थे। कोलकाता हाईकोर्ट ने उनके अच्छे आचरण के आधार पर उनकी उम्रकैद की सजा को कम करते हुए इसे 10 साल की कैद में बदल दिया था। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने इस महीने के शुरू में उन्हें रिहा कर दिया था।

कुछ महीनों से ऐसी अटकलें थीं कि रिहा होने के बाद महतो तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। चटर्जी ने इसपर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि महतो पार्टी में शामिल होते हैं तो यह खुशी की बात होगी। उन्होंने कहा कि महतो के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने से आदिवासी जिलों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं जहां पिछले दो साल में भाजपा ने गहरी जड़ें जमाई हैं जिसने गत लोकसभा चुनाव में क्षेत्र की सभी सातों सीट जीत ली थीं। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने घटनाक्रम को ज्यादा तवज्जो नहीं दी और कहा कि वह इससे चिंतित नहीं है।
– एजेंसी

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