वैराज्ञानंद गिरी Niranjani अखाड़े से निष्कासित

हरिद्वार। दिग्विजय सिंह की जीत के लिए 5 क्विंटल मिर्ची से यज्ञ करने वाले Niranjani अखाड़े के महामंडलेश्वर वैराग्यानंद गिरी महाराज इन दिनों गायब चल रहे हैं।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा चुनाव में भोपाल से कांग्रेस प्रत्याशी रहे दिग्विजय सिंह के पक्ष में प्रचार करने वाले संत पर निरंजनी अखाड़े ने गाज गिराई है। Niranjani अखाड़े ने महामंडलेश्वर वैराज्ञानंद गिरी को अखाड़े से बाहर कर दिया।

हरिद्वार के निरंजनी अखाड़े के सचिव रविन्द्र पुरी ने बताया, महामंडलेश्वर वैराज्ञानंद गिरी ने दिग्विजय सिंह के नहीं जीतने पर समाधि लेने का दावा किया था। साथ ही दिग्विजय सिंह को जिताने के लिए 5 क्विंटल मिर्ची का हवन भी किया गया था। बाबा ने यह भी दावा किया था कि भोपाल में कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ही जीतेंगे. अगर भोपाल में कोई अन्य प्रत्याशी जीतता है तो वह जल समाधि ले लेंगे।

मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह की जीत के लिए मिर्ची यज्ञ करना महामंडलेश्वर वैराग्यानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा को भारी पड़ गया है। निरंजनी अखाड़े ने मिर्ची बाबा के इस काम को अखाड़े की गरिमा के खिलाफ मानते हुए निष्कासित कर दिया है। मिर्ची बाबा की गतिविधियों की जांच के लिए संतों की एक समिति भी बनाई गई है।

अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़े कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह की जीत के लिए महामंडलेश्वर वैराग्यानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा ने कई हफ्तों तक मिर्ची यज्ञ किया था।

बाबा ने यह एलान भी कर दिया था कि यदि चुनाव में दिग्विजय सिंह हार जाते हैं तो वह समाधि ले लेंगे। चुनाव में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भारी मतों से विजय हुई हैं और दिग्विजय सिंह हार गए।
अखाड़ा सचिव बताया कि अखाड़े ने बाबा की गतिविधियों पर आपत्ति जताते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि वैराग्यनंद गिरी के बयान की जानकारी मिलने पर अखाड़ा पंच के सामने यह प्रकरण रखा गया था।

इसमें यह निर्णय लिया गया कि वैराग्यानंद गिरी को अखाड़े से निष्कासित किया जाए। अखाडे़ के श्रीमहंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि हम संत हैं हमें सभी का हित करना है।

देश और समाज के हित में काम करना हमारा ध्येय है लेकिन हम किसी को जिताने के लिए किसी का अहित करने की बात करें यह उचित नहीं है। संतों को ऐसे पाखंड से दूर रहना चाहिए। उन्होंने अन्य संतों से भी ऐसे कृत्यों से दूर रहने की सलाह दी।
-एजेंसी

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