Digital डायग्नोस्टिक का कॉर्पोरेट जगत में बढ़ता चलन

नई दिल्ली। यूं तो आज के समय में सभी एक तेज रफ्तार जीवन जी रहे हैं, लेकिन कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए चुनौतियां और भी अधिक हैं। इस क्षेत्र में काम कर रहे पेशेवरों की व्यस्तता इतनी अधिक रहती है कि उन्हें अपनी सेहत पर पूरी तरह ध्यान दे पाने का समय ही नहीं मिलता। यहाँ तक कि नियमित हेल्थ चेकअप के लिए समय निकाल पाना भी एक असम्भव सा कार्य लगता है।
Dr-Ruchi-Gupta CEO of www.3hcare.in
Dr-Ruchi-Gupta CEO of www.3hcare.in

3 एच केयर की संस्थापक और सीईओ सीए (डॉ.) रुचि गुप्ता के अनुसार कामकाजी लोग अक्सर ऐसा सोचते हैं कि संतुलित आहार और नियमित व्यायाम उन्हें जीवन भर सेहतमंद रखने के लिए पर्याप्त हैं। लेकिन जिस मानसिक तनाव को रोजाना इस क्षेत्र से जुड़े लोग झेलते हैं, वह सेहत के लिहाज से बिलकुल भी ठीक नहीं होता। दरअसल कॉर्पोरेट के क्षेत्र में बहुत तेज गति से कम होता है और दिन भर भाग-दौड़ लगी रहती है, जाहिर सी बात है ऐसे में तनाव हो हो जाता है। यही तनाव बहुत से बीमारियों को जन्म देने लगता है और यदि समय रहते इलाज ना कराया जाए तो स्थिति गम्भीर भी हो सकती है। लेकिन तमाम व्यस्तताओं के चलते अक्सर इस क्षेत्र से जुड़े लोग अपनी सेहत को नजरंदाज करने लगते हैं और उनका शरीर बीमारियों का घर बन जाता है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि इस क्षेत्र से जुड़े कामकाजी लोगों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाये, ताकि वह किसी बीमारियों को लेकर किसी भी आपात या अप्रिय स्थिति से खुद को सुरक्षित रख सकें।

यहाँ इस बात को समझने की आवश्यकता है कि कामकाज से सम्बन्धित व्यस्तताएं कभी कम नहीं होतीं, लेकिन इसका यह अर्थ बिलकुल नहीं है कि सेहत के साथ समझौता कर लिया जाये। इसीलिए आजकल ऑनलाइन हेल्थ केयर पोर्टल तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। आजकल हर क्षेत्र का सारा काम डिजिटल हो गया है, ऐसे में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में यह डिजिटल हेल्थ केयर पोर्टल निश्चित रूप से एक सराहनीय कदम है। यह पोर्टल किस हद तक उपयोगी और लोकप्रिय हो रहे हैंए इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कामकाजी लोग इन पोर्टल्स पर उपलब्ध सुविधाओं के खूब इस्तेमाल कर रहे हैं।
कॉर्पोरेट क्षेत्र को सेहतमंद बनाने का उद्देश्य
विभिन्न शोधों द्वारा यह बात सामने आई है कि अपने काम में बहुत अधिक व्यस्त रहने के कारण अक्सर पेशेवर लोग डॉक्टर के पास जाने का समय नहीं निकाल पाते और इसी वजह से अपनी शारीरिक या मानसिक अस्वस्थता को नजरंदाज करते रहते हैं। करीब 70 प्रतिशत कामकाजी लोग मानते हैं कि डॉक्टर के पास जाने से उनके काम का नुक्सान हो सकता हैए इसलिए वह डॉक्टर के पास जाने की जरूरत को भी टालते रहते हैं।
3 एच केयर डॉट इन  के रूचि गुप्ता कहती हैं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कॉर्पोरेट क्षेत्र से जुड़े लोगों को रोजाना अलग-अलग तरह का तनाव झेलना पड़ता है। काम का दबाव और बहुत सारी जिम्मेदारियां उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करने लगतीं हैं। ऐसे में यह बहुत आवश्यक हो जाता है कि उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की जांच नियमित रूप से अवश्य की जाये ताकि किसी गंभीर बीमारी के होने के खतरे को समय रहते भांप लिया जाये और सेहत को कोई नुकसान ना पहुँचने पाए।
अपने कर्मचारियों की सेहत की जाँच के लिए कॉर्पोरेट ऑफिस में एक हेल्थ चेकअप कैंप लगाया गयाए जहाँ युवा पेशेवरों के स्वास्थ्य की जांच की गयी। इस जांच के नतीजे बेहद चौंकाने वाले थे। विभिन्न स्वास्थ्य परीक्षणों के दौरान पाया गया कि बहुत से युवा पेशेवर शुगरए हाईपरटेंशन और हाईपरथायरोडिज्म जैसी बीमारियाँ से ग्रसित थे। इन युवाओं का मानना था कि इस प्रकार की बीमारियाँ उम्र बढ़ने पर होती हैं और इतनी छोटी उम्र में हो ही नहीं सकतीं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि समय रहते यदि इन बीमारियों का पता चल जाए तो जल्द से जल्द इलाज शुरू किया जा सकता है और सेहत को बहुत ज्यादा नुक्सान पहुँचने से पहले ही रोका जा सकता है।
– Umesh Kumar Singh

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