देवोत्थान एकादशी: मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा में भक्तों ने बनाई श्रृंखला

मथुरा। देवोत्थान एकादशी (Devotthan Ekadashi) पर आज मथुरा-वृंदावन की पंचकोसीय परिक्रमा लगाई जा रही है ज‍िसमें भक्‍तों का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दिन प्रात:काल से ही श्रद्धालु यमुना में स्नान करने के बाद तीन वनों के अंतर्गत गरूड़ गोविंद, मथुरा, वृंदावन की परिक्रमा लगाई जाती है। भोर के समय हल्के से कोहरे की चादर में लिपटे परिक्रमा मार्ग में अटूट मानव श्रंखला दिख रही थी।
ब्रज में तीन दिन वन की परिक्रमा में मथुरा, वृंदावन और गरूड़ गोविंद का इलाका आता है। चूंकि ये परिक्रमा काफी लंबी होती है इसलिए इसे पूरा करने में सामान्यतया 18 से 20 घंटे का समय लग जाता है। इस दिन परिक्रमा करने वाले गाते-बजाते परिक्रमा लगाते हैं।

ये है मान्‍यता और पर‍िक्रमा की कथा
द्वापर युग में कंस वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने तीन वन यानि मथुरा, वृंदावन और गरुड़ गोविंद की परिक्रमा लगाई थी। उनके साथ ब्रजवासियों ने भी परिक्रमा लगाई। तभी से इस परम्परा का निर्वहन भक्तों द्वारा किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि तीन वन परिक्रमा करने से भक्त के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और मनोकामना पूर्ण होती है। देवोत्थान एकादशी पर मथुरा के चतुर्वेदी समाज के लोगों ने शनिवार को कंस वध की प्रतीकात्मक लीला के बाद मध्य रात्रि से ही तीन वन की परिक्रमा शुरू कर दी, वहीं वृंदावन नगर के लोगों ने यहां की पंचकोसीय परिक्रमा कर पुण्य लाभ कमा रहे हैं। पूरा परिक्रमा मार्ग राधे-राधे के जयकारों से गुंजायमान हो रहा था। स्वयंसेवी संस्था, आश्रम एवं मंदिर संचालकों द्वारा परिक्रमा मार्ग में परिक्रमार्थियों की सुविधा के लिए कहीं हलवा पूड़ी, साग पूड़ी, चाय और फलाहर आदि का वितरण किया जा रहा है वहीं कई जगह प्राथमिक स्वास्थ्य शिविर लगाकर नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। नगर निगम प्रशासन ने सफाई की समुचित व्यवस्था के लिए चप्पे-चप्पे पर सफाई कर्मचारी तैनात कर रखे हैं। वहीं पुलिस प्रशासन भी परिक्रमा पर पैनी नजर रखे हुए हैं। हालांकि परिक्रमा मार्ग चार पहिया वाहन दौड़ते रहे।

वृंदावन में राधे-राधे और बांकेबिहारी के जयकारों से गूंजे

वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन करने के बाद वृंदावन की पंचकोसीय परिक्रमा शुरू की। रविवार सुबह से परिक्रमा मार्ग पर भक्तों का रेला उमड़ पड़ा, जिससे अटूट मानव श्रृंखला बन गई। पूरी नगरी राधे-राधे और बांकेबिहारी के जयकारों से गूंज रही है।
रविवार को सुबह नगर के संतों के साथ अधिकारियों ने वृंदावन की पंच कोसीय परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित किया। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के तत्वावधान में 10 नवंबर से ब्रज रज महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसके तहत कार्तिक शुक्लपक्ष एकादशी पर संतों के सानिध्य में अधिकारियों ने नगर की पंच कोसीय परिक्रमा की।

प्राचीन सुदामा कुटी आश्रम से गौसेवी सन्त सुदामादास महाराज की प्रतिमा के पूजन के बाद राधे-राधे के जयकारे से परिक्रमा शुरू हुई। हरिनाम संकीर्तन करते हुए संतजन परिक्रमा की अगुआई कर रहे थे। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह संतों का स्वागत किया। केशीघाट पर परिक्रमार्थियों द्वारा मां यमुना महारानी का विधिवत पूजन अर्चन किया।

करीब तीन घंटे के बाद परिक्रमा पुनः सुदामाकुटी पर संपन्न हुई।
– एजेंसी

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