सदन में हंगामे पर उपसभापति बोले, सबको विचार करने की जरूरत

नई दिल्‍ली। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान राज्यसभा में हुए हंगामे और संबंधित लोगों पर कार्यवाही को लेकर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में संबंधित लोग निश्चित रूप से सदन में हुई ऐसी घटनाओं पर पहले भी विचार कर रहे होंगे। ये उनका कार्यक्षेत्र है। हालांकि, राज्यसभा के उपसभापति ने इस सदन में सांसदों के व्यवहार को लेकर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का उल्लेख किया।
पंडित नेहरू के कथन पर गौर करने की जरूरत
उपसभा पति ने कहा कि संसद के संदर्भ में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि हम संसद में जो कुछ करते हैं, उस पर बहुत गौर करने की ज़रूरत है क्योंकि हमारे आचरण, मर्यादा, बातचीत के तौर-तरीके नीचे पंचायतों तक पहुंचेंगे। इसी से लोकतांत्रिक संस्कृति मजबूत होगी। अगर यहां किसी तरह की चीज होती है तो उसका गलत असर नीचे तक जाएगा।
सभी को आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत
उपसभापति ने कहा कि आज हमें पंडित नेहरू के इस कथन को याद करना चाहिए और आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। यह हर दल पर लागू होता है। इससे संसदीय व्यवस्था से जुड़े ऊपर से लेकर नीचे तक जुड़े, पंचायत तक के व्यक्ति को आत्ममंथन करना चाहिए। देश में कैसे आजादी के समय पंडित नेहरू ने जो आदर्श रखा या महात्मा गांधी की परिकल्पना थी कि कैसे उसका पालन हो।
उच्च सदन के गठन के आदर्शों को प्राप्त करें
राज्यसभा में हंगामे की वजह से उच्च सदन की मर्यादा को धक्का लगने के सवाल पर हरिवंश ने कहा कि राज्यसभा के संदर्भ में जब संविधान सभा में बहस हो रही थी, उस समय संविधान सभा में एक से एक ख्यातिनाम, मर्यादित, ज्ञानवान और अपने-अपने क्षेत्र के बिल्कुल शिखर के लोग शामिल थे। उनकी परिकल्पना थी कि इस सदन की जरूरत इसलिए है क्योंकि लोकसभा और विधानसभा से प्रत्यक्ष रूप से वैसे लोग चुनकर नहीं आएंगे जो बहुत गहराई और गंभीरता से चीजों पर विचार विमर्श कर सकें। चीजों पर गहराई से सोच सकें ताकि देश को नई धारा मिले। यह राज्यसभा के गठन की परिकल्पना थी। ऐसे में हर राजनीतिक दल का कर्त्तव्य बनता है कि कैसे उस आदर्श को प्राप्त कर सकें।
राष्ट्रपति बोले, संसद लोकतंत्र का मंदिर
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने संसद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है, जो जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा और निर्णय करने का सर्वोच्च मंच है। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब हाल ही में खत्म हुए संसद के मॉनसून सत्र के दौरान काफी हंगामा और व्यवधान देखने को मिला था। संसद के मॉनसून सत्र को समय से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था।
-एजेंसियां

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