पाकिस्तान में 10 साल की बच्‍ची का शव मिलने के बाद प्रदर्शन

इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान में 10 साल की एक लापता बच्ची का शव मिलने के बाद परिजन ने पुलिस पर केस दर्ज करने में टालमटोल का आरोप लगाया है. ये आशंका जाहिर की जा रही है कि पहले बच्ची को अगवा किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए प्रदर्शन हो रहे हैं. इस मामले में लापरवाही के आरोपों में घिरे पुलिस के अधिकारियों के ख़िलाफ कार्यवाही की गई है.
बच्ची के परिवार वालों के मुताबिक पहले तो पुलिस ने कहा कि बच्ची ‘खुद से कहीं भाग गई होगी’. इसके बाद उनसे अफ़सरों के निजी काम कराए गए. पुलिस ने इन आरोपों से इंकार किया है.
फ़रिश्ता नाम की बच्ची 15 मई को लापता हो गई थी और एक शव 20 मई को पाया गया, जो फ़रिश्ता का लग रहा था.
पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या बच्ची के साथ बलात्कार और टॉर्चर हुआ है. इस बीच उसे न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. मंगलवार को इस्लामाबाद में हज़ारों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए.
इस घटना से जनवरी 2018 में छह साल की ज़ैनब अंसारी के बलात्कार और हत्या की यादें ताज़ा हो गई हैं, जब पूरे देश में प्रदर्शन शुरू हो गए थे.
फ़रिश्ता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर #JusticeForFarishta ट्रेंड कर रहा है और लोग उसे इंसाफ दिलाने की मांग कर रहे हैं.
परिवार का क्या कहना है?
फ़रिश्ता के पिता ग़ुलाम नबी ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की.
उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझसे ऑफ़िस साफ़ करने, फ़र्नीचर हटाने और इफ़्तार के लिए बाज़ार से फल लाने को कहा.”
ग़ुलाम नबी बताते हैं, “उन चार दिन मैं इतना परेशान था कि अगर दिन रात बताऊं तो भी बात ख़त्म नहीं होगी.”
बुधवार को कई पुलिस अधिकारियों पर लापरवाही का मामला दर्ज किया गया.
शाहज़ाद पुलिस स्टेशन के इंचार्ज मुहम्मजद अब्बास राना को निलंबित कर दिया गया है.
हालांकि उनका कहना है कि उन्होंने मामले में कार्यवाही की और 16 मई को परिजन और पड़ोसियों से पूछताछ की थी.
उन्होंने कहा कि केस दर्ज करने में देरी के लिए परिजन ही ज़िम्मेदार हैं.
पुलिस अफ़सर ने कहा, ‘भाग गई होगी’
डॉन अख़बार के अनुसार, फ़रिश्ता की गुमशुदगी मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
लेकिन औपचारिक जांच रविवार को ही शुरू हुई, जब एक राजनेता ने इस्लामाबाद के इंस्पेक्टर जनरल से इसकी शिकायत की.
इसके दूसरे दिन फ़रिश्ता का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ. इससे लोगों में आक्रोश पैदा हुआ कि अगर पुलिस ने समय रहते कार्यवाही की होती तो उसकी जान बचाई जा सकती थी.
फरिश्ता के पिता नबी ने बताया कि अब्बास राना ने शुरू में मामला दर्ज करने से मना कर दिया और कहा कि बच्ची अपने मन से किसी के साथ भाग गई होगी. राना ने इन आरोपों से इंकार किया है.
फ़रिश्ता इस्लामाबाद में अपने घर के पास से लापता हुई थी. जब शाम को इफ़्तार के समय भी वो नहीं लौटी तो तलाश शुरू हुई.
काफ़ी तलाश के बाद परिजन पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने गए.
सोमवार को फ़रिश्ता का शव बरामद हुआ. अस्पताल में डॉक्टर छुट्टी पर थे इसलिए ऑटोप्सी में देरी हुई, जिससे परिजन वहीं धरने पर बैठ गए.
उनके साथ पख़्तून प्रोटेक्शन मूवमेंट के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हो गए, जो पाकिस्तान में अल्पसंख्यक पख्तून समुदाय के अधिकारों के लिए अभियान चलाते हैं.
फ़रिश्ता का परिवार इसी समाज से आता है, जो उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान से विस्थापित हज़ारों परिवारों में से एक है. यहां पाकिस्तान लंबे समय से चरमपंथ विरोधी अभियान चला रहा है.
-BBC

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »