छात्रों के 2.4 करोड़ रुपये दबाकर बैठी है दिल्‍ली यूनिवर्सिटी

नई दिल्‍ली। पिछले 3 वित्त वर्षों में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एडमिशन के वक्त स्टूडेंट्स से 2.8 करोड़ रुपये रिफंडेबल फीस के तौर पर लिए हैं। इनमें से 2.4 करोड़ रुपये को न तो यूनिवर्सिटी ने फीस चुकाने वाले स्टूडेंट्स को वापस लौटाए हैं और न ही उन्हें वाइस चांसलर के स्टूडेंट फंड में ही जमा कराया है। इनमें से एक रुपया भी किसी जरूरतमंद स्टूडेंट की मदद के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ है। नियम यह है कि स्टूडेंट्स को रिफंड करने के बाद बची हुई रकम को वीसी के स्टूडेंट फंड में जमा कराया जाता है, जिसका इस्तेमाल आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की मदद में किया जाता है।
डीयू में एडमिशन के वक्त स्टूडेंट्स से लाइब्रेरी सिक्योरिटी एंड साइंस कॉशन मनी के तौर पर एक रिफंडेबल फीस वसूली जाती है।
डीयू रूल्स के मुताबिक कोर्स की समाप्ति यानी नतीजों के ऐलान के बाद ग्रेजुएट स्टूडेंट्स को संस्थान छोड़ने की तारीख के एक साल के भीतर यह फीस रिफंड हो जाती है।
आरटीआई एक्टिविस्ट और डीयू के लॉ स्टूडेंट प्रशांत कुमार की आरटीआई के जवाब में मुताबिक डीयू ने 2016 से 2019 के दौरान लाइब्रेरी सिक्योरिटी के तौर पर 2.83 करोड़ और साइंस कॉशन मनी के तौर पर 25,990 रुपये वसूले। उनकी एक अन्य आरटीआई के जवाब में डीयू ने बताया कि इस अवधि के दौरान 46.49 लाख रुपये स्टूडेंट्स को रिफंड किए गए। इस तरह 2.37 करोड़ रुपये अभी भी ‘अनक्लेम्ड’ पड़े हुए हैं।
वीसी स्टूडेंट फंड का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के छात्रों को इन 5 स्थितियों में वित्तीय मदद मुहैया कराने के लिए होता है- गरीबी रेखा से नीचे के छात्र, दिव्यांग स्टूडेंट के इलाज में मदद, योग्य स्टूडेंट की हॉस्टल फीस का भुगतान, किसी हादसे में स्टूडेंट की मौत या स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में मुआवजा और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन व कार्यक्रमों में शिरकत के लिए मदद।
प्रशांत कुमार ने एक अन्य आरटीआई आवेदन के पूछा था कि 2016 से 2019 के दौरान 3 वर्षों में वीसी स्टूडेंट फंड से कितने स्टूडेंट्स को ग्रांट दिया गया। इस आरटीआई के जवाब में डीयू ने बताया कि इस अवधि के दौरान वीसी स्टूडेंट फंड में एक भी पैसा आवंटित नहीं किया गया और न ही उपरोक्त श्रेणियों में किसी भी स्टूडेंट को किसी तरह की वित्तीय मदद दी गई।
प्रशांत कुमार ने इसके लिए ऑडिट किए जाने और जवाबदेही तय करने की मांग की है क्योंकि डीयू को इतना फंड मिलता है जितना 2-3 जिलों को विकास के लिए ग्रांट मिलते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि डीयू जब ऑनलाइन फीस वसूलता है तो उसे ऑइनलाइन ही रिफंड क्यों नहीं करता। उन्होंने पूछा कि सुदूर इलाकों में रहने वाले स्टूडेंट 1500 रुपये के रिफंड के लिए दिल्ली तक की यात्रा क्यों करेंगे।
-एजेंसियां

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