JNU में दलित-माइनॉरिटी रिसर्च सेंटर बंद करने के फर्जी फरमान की जांच दिल्‍ली पुलिस करेगी

Delhi Police will investigate the fake decree for closure of Dalit-Minority Research Center in JNU
JNU में दलित-माइनॉरिटी रिसर्च सेंटर बंद करने के फर्जी फरमान की जांच दिल्‍ली पुलिस करेगी

नई दिल्ली। JNU में दलित-माइनॉरिटी इशू पर रिसर्च कर रहे ‘सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन ऐंड इन्क्लूसिव पॉलिसी’ (CSDE) को बंद करने का फरमान किसने भेजा? इसकी जांच दिल्ली पुलिस करेगी। इस संबंध में भारत सरकार के डिप्टी सेक्रटरी स्तर के अधिकारी की शिकायत पर आईपी एस्टेट थाने में धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और षड्यंत्र रचने की दफाओं में बीते बुधवार FIR दर्ज हो गई है।
पुलिस जांच करेगी कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से जेएनयू को भेजे गए फर्जी लेटर के पीछे किसकी साजिश थी, इससे किसी को क्या फायदा हो सकता था, अगर यह शरारत थी तो उसके पीछे कौन लोग हैं, ऐसी अफवाह फैलाने से उनका क्या मकसद हल होता, आदि सवालों के जवाब पुलिस को खोजने हैं।
यूजीसी के लेटर हेड पर जेएनयू रजिस्ट्रार को 6 मार्च को लेटर मिला था, जिसमें लिखा था कि यूजीसी ने 12वें प्लान की समाप्ति के बाद सेंटर CSDE को बंद करने का फैसला किया है। बता दें कि CSDE जेएनयू में स्कूल ऑफ सोशल साइंस के तहत आता है। इसमें दलित, एसटी, माइनॉरिटी से जुड़े मसलों पर और उनके साथ भेदभाव कैसे खत्म हो, जैसे मसलों पर रिसर्च की जाती है ताकि उस आधार पर पॉलिसी बनाई जा सके।
इस लेटर के बाद जेएनयू स्कॉलर्स में हड़कंप मच गया। वह एकाएक सेंटर को बंद करने के फैसले से परेशान हो गए। सुगबुगाहट और विरोध होने लगा। सुर्खियां बनीं। जब मामला यूजीसी तक पहुंचा तो लेटर की जांच करवाई गई। पता चला कि ऐसा कोई लेटर जारी नहीं हुआ है। यूजीसी ने बयान जारी किया कि उनकी ओर से सेंटर को बंद करने के संबंध में कोई लेटर जारी नहीं हुआ है। यूजीसी 1 अप्रैल 2017 से आगे भी फंड देना जारी रखेगा।
यूजीसी के मुताबिक जिस लेटर के हवाले से यह अफवाह फैलाई गई, वह 10 मार्च को मुंबई के एक नंबर से जेएनयू में फैक्स हुआ था, जबकि यूजीसी का मुंबई में कोई ऑफिस नहीं है। लेटर पर यूजीसी की अंडर सेक्रटरी सुषमा राठौर के साइन थे, जिसे फर्जी बताया गया।
-एजेंसी

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