दिल्ली सरकार के 19 लाख में से 15 लाख Ration card फर्जी

भूख से तीन बच्चियों की मौत के बाद सामने आया फर्जी Ration card का मामला

नई दिल्‍ली। दिल्ली में 19 लाख Ration card बने हैं, मगर इनमें से 15 लाख से भी अधिक फर्जी हैं और रिकॉर्ड में दिल्ली का कोटा फुल हो चुका है इसीलिए दिल्ली में भूख से तीन बच्चियों की मौत हो गई क्‍योंकि उस परिवार के पास भी Ration card नहीं था।

इस तरह के और भी परिवार हैं जो दिल्‍ली सरकार द्वारा निर्धारित मानदंड पूरे नहीं करते, इसकी जांच कराने के लिए संघर्ष कर रहे पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है कि यह घपला रुकना चाहिए। इस बारे में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन से उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया मगर उनसे संपर्क नहीं हो सका।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू किया था। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संसद में बयान दिया था कि अब कोई गरीब भूख से नहीं मरेगा। इस प्रणाली में राशन बहुत सस्ता कर दिया गया था, मगर गरीबों का यह हक अमीरों ने मार दिया।

इसके तहत दो तरह के राशन कार्ड बनाए गए। एक सामान्य तथा दूसरा अंत्योदय। सामान्य राशन कार्ड इसमें परिवार के एक सदस्य यानी एक यूनिट पर चार किलो गेहूं व एक किलो चावल मिलता है। गेहूं का दाम दो रुपये प्रति किलो और चावल का मूल्य तीन रुपये प्रति किलो है। कार्ड में परिवार के जितने सदस्य दर्ज हैं, उस हिसाब से राशन मिलता है।

अंत्योदय कार्ड प्रतिवर्ष 24 हजार रुपये की आय वाले परिवारों को अंत्योदय कार्ड मिलता है। वर्ष 2013 के बाद दिल्ली में एक भी व्यक्ति को यह कार्ड नहीं मिला है। प्रत्येक कार्ड पर 25 किलो गेहूं और 10 किलो चावल मिलता है। गेहूं का भाव दो रुपये प्रति किलो तथा चावल का भाव तीन रुपये प्रति किलो है। अंत्योदय कार्ड धारक को हर माह एक किलो चीनी 13.50 रुपये में मिलती है।

वर्ष 2013 में जल्दबाजी में बनाए गए थे राशन कार्ड
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बेघरों के राशन कार्ड बनने बंद हो गए हैं। इससे भी गरीबों के लिए राशन कार्ड बनवा पाना बेहद जटिल हो गया है, जबकि इन्हें ही राशन कार्ड की अधिक जरूरत है। वहीं तमाम किरायेदारों के भी राशन कार्ड नहीं बने हैं क्योंकि मकान मालिक किरायेदार का राशन कार्ड बनाने के लिए लिख कर नहीं देता है।

विभागीय सूत्रों की मानें तो 2013 में जल्दबाजी में राशन कार्ड बनाए गए थे। उस समय तमाम लोगों ने फॉर्म में गलत जानकारी भरकर राशन कार्ड बनवा लिए थे। बहुत से ऐसे लोगों ने भी राशन कार्ड बनवा लिए हैं जिनके पास कार, अपना घर और दो किलोवाट से अधिक के बिजली के मीटर भी हैं।

ऐसे लोगों की संख्या 15 लाख से भी अधिक बताई जा रही है, मगर वोट बैंक के चक्कर में सरकार इस मामले में कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।

गलत जानकारी देने पर है सात साल की सजा
राशन कार्ड के आवेदन पत्र में एक शपथपत्र होता है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि आवेदक द्वारा दी गई सभी जानकारी सही है। यदि जानकारी गलत साबित होती है तो आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत उसे तीन से लेकर सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

प्रतीक्षा सूची के चार लाख परिवारों के बन सकते थे राशन कार्ड
दिल्ली में नए राशन कार्ड नहीं बन रहे हैं इसलिए प्रतीक्षा सूची लंबी होती जा रही है। दरअसल जनवरी 2018 में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने राशन की सभी 24 सौ दुकानों में ई-पॉस प्रणाली लागू की थी। इसके तहत राशन लेने के लिए कार्डधारक को आधार कार्ड देना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसमें लोगों के फिंगर प्रिंट के आधार पर राशन दिया जाना था। किसी कारणवश जिनके फिंगर प्रिंट सिस्टम में नहीं आ रहे थे, उनके मोबाइल पर ओटीपी जारी करने का प्रावधान किया गया था। करीब चार लाख लोग ऐसे थे जो जनवरी से लेकर मार्च तक राशन लेने नहीं आए।

यह है विभाग का नियम
यदि तीन माह तक व्यक्ति राशन लेने नहीं आता है तो उसका राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाएगा। विभाग ने इसके तहत इन राशन कार्ड को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की थी, मगर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन ने आदेश जारी कर कहा, ‘मेरी बगैर अनुमति के एक भी राशन कार्ड निरस्त नहीं किया जाए। उन्होंने इसके लिए इन लोगों का पक्ष लेने के लिए कहा था।

दिल्ली विधानसभा मेें नेता प्रतिपक्ष  विजेंद्र गुप्ता  के मुताबिक, आखिर आम आदमी पार्टी चार लाख संदिग्ध कार्डधारकों पर मेहरबान क्यों है? दिल्ली में ई-पॉस प्रणाली से ही राशन दिया जाना चाहिए। ये राशन कार्ड निरस्त होते तो चार लाख नए और सही लोगों को फायदा मिलता।

-एजेंसी

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