Rezangla Day पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश को सौंपा Rezangla वॉर मेमोरियल, ब्रिगेडियर आर वी जतर को किया एस्कॉर्ट

लेह। 1962 की लड़ाई में भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों के छक्के छुड़ा दिए थे। रेजांगला में जमा देने वाली ठंड में भारतीय जवानों ने ड्रैगन के जवानों को पीछे धकेल दिया था। भारत-चीन की लड़ाई में कुमाऊं रेजिमेंट का बड़ा योगदान रहा था। इस रेजिमेंट ने चीनी जवानों को जोरदार टक्कर दी थी। इसी रेजिमेंट के ब्रिगेडियर आर वी जतर (रिटायर्ड) ने इस युद्ध में अदम्य वीरता का परिचय दिया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जब आज रेजांगला में नवीनीकृत रेजांगला वॉर मेमोरियल देश को सौंपा। इससे पहले राजनाथ सिंह ब्रिगेडियर जतर को व्हीलचेयर पर बैठाकर मेमोरियल तक ले गए।

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13 कुमाऊं के ब्रिगेडियर आर वी जतर ने 1962 के भारत-चीन संघर्ष में बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी। चीन के साथ जंग के वक्त जतर कंपनी के कमांडर थे। उन्होंने चीनी सैनिकों के खिलाफ जमकर लोहा लिया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जतर को स्कॉर्ट करते हुए कहा कि वह जतर के साहस को नमन करते हैं।
Rezangla Day आज
LAC पर जिस तरह चालें चीन इन दिनों चल रहा है, कुछ इसी तरह की उसकी चालों को भारतीय सेना ने 18 नवंबर 1962 को ‘रेजांगला’ (Rezangla Day) में करारा सबक सिखाकर फेल किया था। भारतीय जवानों ने अपने शौर्य से चीनी सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। तमाम कोशिशों के बावजूद चीनी सैनिक रेजांगला चौकी पर कब्जा नहीं कर पाए थे।
18,000 फीट की ऊंचाई पर भारतीय सैनिकों का पराक्रम
18 नवंबर 1962 को भारत-चीन युद्ध के दौरान 18,000 फीट की ऊंचाई पर रेजांगला पोस्ट पर कुमाऊं रेजिमेंट के 120 जवानों ने अदभुत वीरता का परिचय दिया था। भारत के वीर जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान करते हुए चीनी सैनिकों को रेंजागला पोस्ट पर कब्जा नहीं करने दिया। इस युद्ध में कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने कई चीनी सैनिकों को मार गिराया। जवानों ने .303 के रायफल्स से चीनी सैनिकों को ऐसे घाव दिए जो ड्रैगन को आज भी सालता है।
माइनस में तापमान, खाली हाथ जवानों ने सिखाया चीन को सबक
मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में 13 कुमाऊं बटालियन की चार्ली कंपनी ने शरीर को जमा देने वाली ठंड चीनी सैनिकों को छठी का दूध याद दिला दिया। इस युद्ध में मेजर शैतान सिंह और 98 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। हालांकि, शहादत देने से पहले भारतीय जवानों चीन के 400 सैनिकों को मार गिराया था। चीन तमाम कोशिशों के बाद भी रणनीतिक रूप से अहम इस पोस्ट पर कब्जा नहीं कर पाया था।
चीन ने शुरू की थी नापाक हरकत
1962 के युद्ध हिस्ट्री के अनुसार चीन ने 18 नवंबर को तड़के 4 बजे भारतीय इलाके में हमला शुरू कर दिया। चीन की सेना की मंशा लेह और चुशूल रोड लिंक को वाया दुंगती को ब्लॉक करने की थी। भारतीय जवानों ने चीन की इस हरकत का करारा जवाब दिया।
मोर्टार, रायफल और फिर खाली हाथ.. भारतीय जवानों का शौर्य
मेजर शैतान सिंह और उनकी कंपनी ने शुरुआत में 3 इंच के मोर्टार से लड़ाई शुरू की। फिर रायफल्स और उसकी बट से लड़ाई जारी रखी। इस दौरान भारतीय जवानों को किसी प्रकार की कोई हवाई मदद भी नहीं मिली थी। चीनी सेना ने दो तरफ से रेजांगला पोस्ट पर हमला किया था। यह भारतीय जवानों का शौर्य ही था कि चीनी सैनिक इस पोस्ट के पास फटक तक नहीं पाए थे।
रेजांगला बन गया भारत का माथा
रेजांगला को इस वक्त भारत की ताकत के तौर पर देखा जाता है। यह इलाका चीनी सीमा के काफी करीब है और यहां से LAC की दूसरी तरफ साफ-साफ देखा जा सकता है।
-एजेंसियां

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