गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं हबीब तनवीर की नाट्य मंडली के ‘चरणदास चोर’

रायपुर। हबीब तनवीर की नाट्य मंडली में ‘चरणदास चोर’ बनने वाले दीपक तिवारी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं , एक जमाना था जब मशहूर रंगकर्मी स्व. हबीब तनवीर की नाट्य मंडली में नाटक चरणदास चोर में चोर की भूमिका निभाने वाले कलाकार दीपक तिवारी छत्तीसगढ़ के रंगमंच के सितारे थे। उनके लाजवाब अभिनय और डॉयलॉग पर दर्शक फिदा थे। गांव-गांव, शहर-शहर नाटकों का प्रदर्शन करके उन्होंने देशभर में काफी नाम कमाया था। अफसोस कि एक समय लोगों की आंखों का तारा रहे कलाकार अब चलने-फिरने में भी लाचार हैं। आर्थिक तंगी से हालत इतनी खराब है कि कहीं ठीक से अपना इलाज तक नहीं करवा पा रहे हैं।

आर्थिक मदद की आस में काट रहे दिन

 

Deepak Tiwari, who became 'Charandas Chor' in Habib Tanvir's Natya Mandali
Deepak Tiwari, who became ‘Charandas Chor’ in Habib Tanvir’s Natya Mandali

पिछले दिनों उनका रायपुर के भीमराव आंबेडकर अस्पताल में इलाज चला। कोई सुधार न होने पर आखिरकार परिवार वाले उन्हें अपने गृहग्राम राजनांदगांव ले गए। उन्होंने कलाकार होने के नाते सरकारी मदद के लिए भी गुहार लगाई है। वे अपने घर पर लाचारी पर आंसू बहाने को मजबूर हैं। वे इस आस में अंतिम सांसें गिन रहे हैं कि शायद कला क्षेत्र से जुड़े संगठन अथवा सरकार की ओर से जीवन के अंतिम दिनों में कोई कुछ मदद मिल जाए।

इन नाटकों से पाई प्रसिद्धि

दीपक तिवारी 1980-90 के दशक में स्व. हबीब तनवीर के ग्रुप नया थियेटर का हिस्सा बने थे। इस संस्था में रहते हुए उन्होंने चरणदास चोर, लाला शोहरत राय, मिटटी की गाड़ी, आगरा बाजार, कामदेव का अपना बसंत ऋतु का सपना, देख रहे हैं नैन, लाहौर नहीं देखा और हिरमा की अमर कहानी जैसे अनेक नाटकों से प्रसिद्धि पाई थी।

कलाकारों की स्थिति निराशाजनक

छत्तीसगढ़ लोक कला एवं कलाकार संगठन के महासचिव शरद अग्रवाल का कहना है कि ज्यादातर कलाकारों का जीवनयापन कला क्षेत्र से मिलने वाले पारिश्रमिक से ही होता है। छत्तीसगढ़ में ऐसे अनेक प्रसिद्ध कलाकार हुए हैं जिन्होंने आर्थिक तंगी के चलते जीवन के अंतिम दिनों में काफी कष्ट भोगा है। संस्कृति विभाग से मदद मिलने की प्रक्रिया का सरलीकरण होना चाहिए। आवेदन से लेकर मदद मिलने तक तेजी से काम हो ताकि समय रहते कलाकारों को मदद मिल सके। हाल-फिलहाल हमने कलाकारों का संगठन इसी उद्देश्य से बनाया है कि वक्त जरूरत पड़ने पर कलाकार एक-दूसरे की मदद के लिए एकजुट हो सकें।

संस्कृति विभाग में मदद का प्रावधान

विभाग के अधिकारी कहते हैं कि संस्कृति विभाग प्रदेश के दिग्गज कलाकारों की मदद के लिए 25 हजार रुपये प्रदान करता है। सरकारी नियमों के चलते मदद की प्रक्रिया में काफी समय लगता है। यदि कोई गंभीर रूप से बीमार है और ज्यादा राशि की मदद चाहिए तो उसके लिए सरकार द्वारा विशेष प्रावधान किए जाते हैं, लेकिन उन प्रक्रियाओं को पूरा होने में भी काफी समय लगता है।
-एजेंसी

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