कुलदीप सेंगर की सजा पर फैसला टला, अब 20 को होगी बहस

नई दिल्‍ली। दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट ने 2017 के उन्नाव रेप केस में दोषी करार दिए कुलदीप सेंगर की सजा पर फैसले को टाल दिया है। अब 20 दिसंबर को सजा पर फिर बहस होगी।
कोर्ट ने बीजेपी के पूर्व विधायक सेंगर द्वारा 2017 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल हलफनामे की प्रति भी मांगी है।
मंगलवार को सजा पर बहस के दौरान सीबीआई ने सेंगर को अधिकतम सजा दिए जाने की मांग की। बता दें कि बीजेपी ने यूपी के बांगरमऊ से 4 बार के विधायक सेंगर को अगस्त 2019 में पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
कल कोर्ट ने ठहराया था दोषी
दिल्ली के तीसहजारी कोर्ट ने बीजेपी से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उन्नाव में 2017 में नाबालिग लड़की से रेप के मामले में सोमवार को दोषी करार दिया। हालांकि, कोर्ट ने एक और आरोपी शशि सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि इस ‘शक्तिशाली व्यक्ति’ के खिलाफ पीड़िता की गवाही ‘सच्ची और बेदाग’ है। अदालत ने सेंगर को आईपीसी के तहत रैप और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत दोषी ठहराया। अपराध साबित होते ही सेंगर की आंखें आंसुओं से भर गई। वह और शशि सिंह आंसू बहाते नजर आए। वहीं, फैसला आने से पहले ही कोर्ट रूम में शशि पर बेहोशी छाने लगी थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली ट्रांसफर हुआ था केस
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले को लखनऊ की अदालत से दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था। डिस्ट्रिक्ट जज धर्मेश शर्मा ने यहां 5 अगस्त से दैनिक आधार पर मामले में सुनवाई की। पीड़िता की कार को इसी साल 28 जुलाई में एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसमें वह गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी। दुर्घटना में युवती की दो रिश्तेदार मारी गईं और उसके परिवार ने इसमें साजिश होने के आरोप लगाए थे।
कोर्ट ने मोबाइल लोकेशन को अहम सबूत माना
कोर्ट ने सेंगर की मोबाइल लोकेशन को केस में अहम सबूत माना। फैसले में कोर्ट ने कहा कि इस बात के साक्ष्य हैं कि पीड़िता को शशि सिंह ही दोषी विधायक के पास लेकर गई थी। डिस्ट्रिक्ट जज धर्मेश शर्मा ने सोमवार को तय वक्त पर फैसला सुनाते हुए कहा कि घटना के वक्त पीड़िता के नाबालिग होने की बात सीबीआई ने साबित की है। हालांकि, उन्होंने रेप के मामले में जांच एजेंसी की ओर से चार्जशीट दायर करने में की गई देरी पर हैरानी भी जताई।
पीड़ित की गवाही ‘सच्ची और बेदाग’
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ‘पीड़िता की गवाही सच्ची और बेदाग थी। उसकी जान को खतरा था, वह चिंतित थी। पीड़िता गांव की लड़की है, महानगरीय शिक्षित इलाके की नहीं…सेंगर एक ताकतवर शख्स था। इसलिए उसने अपना वक्त लिया…। यूपी के सीएम को पत्र लिखे जाने के बाद पीड़िता के परिवारीजनों के खिलाफ कई केस दर्ज किए गए, जिन पर सेंगर का प्रभाव था।’
सीबीआई को भी फटकार
जज ने कहा कि इससे सेंगर और अन्य के खिलाफ मुकदमा लंबा चला। पॉक्सो का जिक्र करते हुए कहा कि कानून में कुछ गलत नहीं, लेकिन इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू करने और संबंधित अधिकारियों में मानवीय रवैये की कमी से अक्सर ऐसी स्थिति बनती है जहां न्याय में देरी होती है। अदालत ने कहा कि सीबीआई खुद जांच और अभियोजन से जुड़े नियमों का पालन नहीं करती है।
-एजेंसियां

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