धोखे देने का बिजनेस है डिस्‍काउंट ऑफर्स, बेवकूफ बनाती हैं कंपनियां

नई दिल्ली। हम से ज्यादातर लोग जब कभी किसी स्टोर के बाहर ‘सेल’ शब्द देखते हैं तो बिना सोचे खरीदारी के लिए आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे लोगों को लगता है कि सेल के वक्त स्टोर उन्हें कम दाम पर चीजें बेच रहा है, जैसा कि स्टोर बताता भी है। मगर क्या वास्तव में हर बार जब कोई स्टोर किसी चीज को कम कीमत पर बेचने की बात करता है तो वह सच बोलता है? सोचो, क्या ऐसा भी हो सकता है कि स्टोर किसी चीज के जिस ‘ऑरिजनल प्राइस’ पर डिस्काउंट दे रहा हो, वह वास्तविक ही न हो? इन सवालों को लेकर हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की मार्केटिंग यूनिट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉनल्ड ऐंग्वे ने एक वर्किंग पेपर तैयार किया। जिसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।
दरअसल प्रोफेसर ऐंग्वे अमेरिकी की एक बड़ी कंपनी से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें आउटलेट स्टोर्स पर कुछ अजीब होता दिखा। प्रोफेसर को पता चला कि कुछ प्रोडक्ट्स को खास तौर पर आउटलेट स्टोर्स पर बेचने के लिए ही तैयार किया गया था, जो कभी रिटेल शेल्व में दिखे ही नहीं थे। इन प्रोडक्ट्स पर ‘असली कीमत’ के साथ डिस्काउंट के बाद वाली कीमत लिखी हुई थी। प्रोफेसर ऐंग्वे का कहना है कि प्रोडक्ट्स पर जो ‘असली कीमत’ लिखी गई थी, उस कीमत पर उनको कभी बेचने की कोशिश ही नहीं हुई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन प्रोडक्ट को उनकी (बताई गई) असली कीमत पर कभी कोई खरीदता भी नहीं।
‘फेक डिस्काउंट्स ड्राइव रियल रेवेन्यूज इन रिटेल’ नाम के अपने वर्किंग पेपर में प्रोफेसर ऐंग्वे ने लिखा है कि मुझे पता चला कि किसी ब्रैंड की फर्जी कीमतों के झांसे में वे ग्राहक आसानी से आ जाते हैं जो उस ब्रैंड के बारे में कम जानते हैं। ऐसे में प्रोफेसर ऐंग्वे लोगों को सलाह देते हैं कि वे किसी चीज को खरीदते समय उसकी कीमत को गुणवत्ता की कसौटी पर रखकर देखें।
-एजेंसियां

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